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पीएम मोदी ने ली वैक्सीन पर बैठक: भारत पड़ोसी देशों में करेगा स्वदेश निर्मित वैक्सीन का ट्रायल

By एसके गुप्ता | Updated: October 17, 2020 19:21 IST

पीएमओ के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिया कि हमें अपने पड़ोसी देशों तक मदद के लिए सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि पूरी दुनिया में वैक्सीन का वितरण करना होगा।

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ठळक मुद्देअफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और मालद्वीप सहित कई देशों से कोरोना वैक्सीन ट्रायल को लेकर बातचीत चल रही है।पैन इंडिया अध्ययन से पता चला कोरोना वायरस की जैनेटिक प्रकृतिक में नहीं है बदलाव।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोरोना वैक्सीन निर्माण और उसके वितरण की तैयारी को लेकर समीक्षा बैठक की। विशेषज्ञों न  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत कर रहा है। अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, मयांमार, श्रीलंका और मालद्वीप सहित कई देश भारतीय कोरोना वायरस वैक्सीन के इंतजार में हैं।

जिस तरह रूस स्पूतनिक-5 को लेकर भारत सहित अन्य देशों में अपनी वैक्सीन का ट्रायल-3 करना चाहता है। उसी तरह स्वेदश निर्मित कोवाक्सिन और कैडिला वैक्सीन के फेस-3 ट्रायल इन पड़ोसी देशों में किए जाएंगे।

पीएमओ के अनुसार प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि हमें अपने पड़ोसी देशों तक मदद के लिए सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि पूरी दुनिया में वैक्सीन का वितरण करना होगा। वैक्सीन वितरण प्रणाली के लिए टीके, दवाइयां और आईटी प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए पूरी दुनिया तक पहुंच होनी जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन के वितरण और रखरखाव की तैयारियों को लेकर विशेषज्ञों को कई निर्देश भी दिए। इसके अलावा अन्य देशों के साथ वैक्सीन कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट नीति तय करने और उत्पादक एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल की जानकारी भी ली।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्द्धन सहित बैठक में नीति आयोग के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी मौजूद थे। जिन्हें कोरोना वायरस की प्रकृति के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोना वायरस की प्रकृति को लेकर पैन इंडिया दो अध्ययन किए गए हैं। यह अध्ययन आईसीएमआर और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने किए हैं।

आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस अध्ययन में इस तथ्य की पुष्टि हुई है कि जैनेटिक रूप से वायरस की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि कोरोना की जिस वैक्सीन को तैयार किया जा रहा है वह वायरस की रोकथाम पर पूरी तरह से कारगर सिद्ध होगी या नहीं। अगर वायरस अपनी जैनेटिक प्रकृति में बदलाव करता है तो वैक्सीन कम कारगर सिद्ध होती। लेकिन जब वायरस की प्रकृति में बदलाव नहीं है तो वैक्सीन 100 फीसदी कार्य करेगी।

वैज्ञानिकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानकारी दी गई कि स्वदेश निर्मित कोवाक्सीन और कैडिला वैक्सीन फेज-2 ट्रायल में हैं। साथ ही ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का फेज-3 ट्रायल जारी है। यह तीनों वैक्सीन काफी एडवांस स्टेज में हैं। जिनके ट्रायल परिणाम इस साल के अंत तक आ जाएंगे। जिससे नए साल के शुरूआत एक दो महीने में देशवासियों को वैक्सीन मिलेगी।

इस सप्ताह में वैक्सीन को लेकर प्रधानमंत्री की यह दूसरी बैठक है। इससे पहले गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना को लेकर अनुसंधान और वैक्सीन परिनियोजन पारिस्थितिकी तंत्र की समीक्षा बैठक ली थी। इसमें परीक्षण तकनीक, संपर्क ट्रेसिंग, ड्रग्स और चिकित्सीय शामिल थे। बैठक में पीएम मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा उपचारों पर आयुष मंत्रालय की सराहना के साथ वैज्ञानिक परीक्षण और सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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