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सीएम नीतीश फिर से लगाएंगे जनता दरबार, कहा-कोरोना काल खत्म होने के बाद जुड़ेंगे, लेंगे फीडबैक

By एस पी सिन्हा | Updated: January 5, 2021 20:17 IST

बिहार में जदयू के सहयोगी भाजपा कोटे के मंत्री कार्यालय में सप्ताह में एक दिन बारी-बारी से जनता दरबार लगाएंगे.  पार्टी की तरफ से इस कार्यक्रम को 'सहयोग' का नाम दिया गया है.

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ठळक मुद्देमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कोरोना महामारी पर सबसे बेहतर काम हुआ है. 55 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि वैक्सीनेशन की एक एक तैयारी में हम लोग जुटे हुए हैं.

पटनाः बिहार सरकार अब जनता की समस्या से एक बार फिर सीधे रू-ब-रू होना चाहती है. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि कोरोना संकट के कारण जनता से सीधे नहीं मिल रहे.

एक बार जब कोरोना खत्म हो तो फिर से जनता की परेशानियों और समस्याओं को सुनेंगे. उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद वह फिर से जनता दरबार की शुरुआत करेंगे और लोगों से डायरेक्ट फीडबैक लेंगे. बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर सातवीं वार शपथ लेने के बाद ही मुख्यमंत्री ने इस बात का एलान किया था कि वह एक बार जनता दरबार कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले हैं. 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कोरोना महामारी पर सबसे बेहतर काम हुआ है. यहां 97 फीसदी से ज्यादा संक्रमित बीमारी से मुक्ति पा चुके हैं. उन्होंने कोरोना वैक्सीन को लेकर कहा कि बिहार में वैक्सीनेशन की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. उन्होंने कहा कि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण होगा. उसके बाद उसके बाद पुलिस कर्मी, जनप्रतिनिधि से लेकर तमाम सरकारी कर्मियों को दिया जायेगा. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वैसे लोग जो कोरोना से पीड़ित हैं, उन्हें भी तत्काल वैक्सीन दी जाएगी.

55 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी

55 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि वैक्सीनेशन की एक एक तैयारी में हम लोग जुटे हुए हैं. कोरोना वैक्सीन को लेकर हो रही सियासत पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी.

अखिलेश यादव द्वारा वैक्सीन नहीं लगवाने वाली बात पर नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में दिलचस्पी नहीं है. लोग क्या कह रहे हैं. हम ध्यान नहीं देते. उन्होंने कहा कि अखबार में छपने के लिए लोग कुछ भी बोलते रहते हैं. हम उन बातों पर ध्यान नहीं देते. 

कुमार ने जनता के दरबार में मुख्यमंत्री नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की थी

यहां उल्लेखनीय है कि कि 2005 में सत्ता में आने के बाद जनता की परेशानियों और समस्याओं को सुनने के लिए नीतीश कुमार ने जनता के दरबार में मुख्यमंत्री नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की थी. पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास में बड़ी संख्या में हर सोमवार को बिहार के हर जिले से लोग आते थे और लिखित आवेदन देते थे.

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री के साथ मंत्री और सचिव दोनों रहते थे. इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को अपने काम काज का फीडबैक सीधे जनता से मिलता रहता था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस कार्यक्रम की बड़ी सराहना होती थी. बिहार के लोगों के साथ सीधे बात करने का फायदा मुख्यमंत्री को अपनी सरकार चलाने में मिलता रहा है.

साथ ही प्रदेश में जनता के साथ किस प्रकार की समस्या है, इसे भी करीब से जानने का मौका मिला है. लेकिन पिछले एक साल से वह जनता के साथ सीधा संवाद नहीं कर पा रहे थे. लेकिन, अब नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह फिर से जनता के बीच दरबार लगाएंगे और उनकी समस्या को लेकर वहीं सुलझाएंगे.

टॅग्स :बिहार में कोरोनानीतीश कुमारजेडीयूभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)आरजेडीकोविड-19 इंडिया
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