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कोरोना संक्रमण से ठीक मरीजों को आजीवन रह सकती है ये समस्याएं, स्टडी में हुआ खुलासा

By अनुराग आनंद | Updated: June 23, 2020 17:44 IST

कोरोना संक्रमण को लेकर नए रिसर्च में यह सामने आया है कि बीमारी से ठीक होने के बाद भी मरीज को लंबे समय तक मानसिक व शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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ठळक मुद्देकोरोना मरीजों को फेफड़े में संक्रमण की वजह से न सिर्फ सांस लेने में दिक्कत होती है, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्से में खून की भी कमी हो जाती है।इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संगठन नेशनल हेल्थ सर्विस ने अपने रिसर्च में कोरोना मरीजों के ठीक होने बाद भी उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले असर को बताया है।कोरोना से ठीक होने वाले 30 फीसदी मरीजों के फेफड़ों को क्षति पहुंच सकती है।कोरोना से ठीक होने वाले 30 फीसदी मरीजों के फेफड़ों को क्षति पहुंच सकती है।

नई दिल्ली: भारत में कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी से वृद्धि हो रही है। हर लोग जहां 10 हजार से अधिक लोग देश में कोरोना संक्रमण के शिकार हो रहे हैं, वहीं हजारों की संख्या में रोज लोग ठीक होकर घर भी जा रहे हैं।

इस बीच एक चौकाने वाली खबर सामने आ रही है। टेलिग्राफ के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के मरीजों में ठीक होने के बाद भी कुछ समस्याएं आजीवन उनके साथ रह सकती हैं। टेलिग्राफ की मानें तो इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संगठन नेशनल हेल्थ सर्विस ने अपने रिसर्च के बाद ये बातें प्रकाशित की हैं।

कोरोना के मरीजों को ठीक होने के बाद भी फेफड़े सबंधी समस्या हो सकती है- 

बता दें कि नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने रिसर्च के बाद कहा है कि कोरोना संक्रमण के वायरस मरीजों के फेफड़ों पर काफी ज्यादा असर करते हैं। जैसे ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है, यह फैफड़ों में कफ बनाने लगता है और साथ ही संक्रमण भी फेफड़े में तेजी से फैलाता है।

ऐसे में लोगों को न सिर्फ सांस लेने में दिक्कत होती है, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्से में खून की भी कमी हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि फेफड़ा रक्त को सही से पंप नहीं कर पाता है।

यही वजह है कि कोरोना से ठीक होने वाले 30 फीसदी मरीजों के फेफड़ों को क्षति पहुंच सकती है। ऐसे मरीजों को कोरोना से ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक फेफड़े में दर्द या सांस लेने की समस्या हो सकती है। 

मानसिक व शारीरिक थकान महसूस होना-

कोरोना मरीज को ठीक होने के बाद लगातार थकान आने की समस्याएं हो सकती है। दरअसल, ऐसा कई वजहों से होता है जैसे शरीर में अधिक कमजोरी होने की वजह से या फिर ऑक्सीजन के शरीर के हर अंग तक नहीं पहुंचने की वजह से भी थकान महसूस होता है। ऐसे में जब आप शारीरिक तौर पर स्वस्थ्य नहीं महसूस करते हैं तो मानसिक तकलीफ भी हो सकती है। आईसीयू में इलाज के बाद जो मरीज ठीक हुए हैं उनमें से आधे लोगों को लंबे वक्त तक दिक्कतें आ सकती हैं।

अलजाइमर जैसे दिमागी बीमारी के भी शिकार हो सकते हैं-

इस रिसर्च में एक बात यह भी सामने आई है कि कोरोना से शरीर को कुछ स्थाई समस्याएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना से बीमार होकर ठीक होने वाले लोगों के दिमाग को भी नुकसान पहुंच सकता है और अलजाइमर का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में कोरोना मरीजों को मानसिक तौर पर कमसे-कम लोड लेना चाहिए। वह जितना अधिक चिंता करेंगे उतना ही अधिक उनके मानसिक बीमारी की संभावना अधिक हो जाती है। 

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