घबराने की जरूरत नहीं, कोविड अनुकूल व्यवहार करें : उपराष्ट्रपति ने ओमीक्रोन स्वरूप पर कहा
By भाषा | Updated: December 4, 2021 21:14 IST2021-12-04T21:14:54+5:302021-12-04T21:14:54+5:30

घबराने की जरूरत नहीं, कोविड अनुकूल व्यवहार करें : उपराष्ट्रपति ने ओमीक्रोन स्वरूप पर कहा
नयी दिल्ली, चार दिसंबर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को लोगों से कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से न घबराने का अनुरोध किया और उन्हें सतर्क रहने और महामारी के खत्म होने तक कोविड अनुकूल व्यवहार करते रहने की सलाह दी।
उपराष्ट्रपति निवास में यहां एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से संकोच छोड़ने और जल्द से जल्द कोविड-19 रोधी टीके की खुराक लेने का भी अनुरोध किया।
उपराष्ट्रपति सचिवालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नायडू ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी पूरी मानव जाति के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर आयी है और उन्होंने भारत में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की सराहना की।
नायडू ने पिछले सात वर्षों में शासन में आए परिवर्तनकारी बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये बदलाव 1.3 अरब लोगों को सशक्त और सक्षम बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे जीवन प्रत्याशा हो, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच, रोजगार, मकान मालिक बनना या उद्यमिता क्षमता को सम्मानित करना हो, भारतीय जिंदगियों की गुणवत्ता हर बीतते दिन के साथ बेहतर हो रही है।’’
प्रधानमंत्री के तीन शब्दों के मंत्र ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति ने पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि वित्तीय समावेशन, बीमा, गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन और घरों तक पीने का पानी पहुंचाने में देश द्वारा की गयी शानदार प्रगति की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ‘‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’ के सिद्धांत का पालन करते हुए सरकार हर क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर रही है और उन्होंने भारत के दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनने पर संतोष जताया।
उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा, ‘‘यह देश में कारोबार के माहौल को सुधारने की सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का सबूत है कि विश्व बैंक के व्यापार सुगमता सूचकांक 2020 में भारत 63वें स्थान पर पहुंच गया है।’’
उन्होंने कहा कि भारत की रणनीतिक भागीदारियां परस्पर सम्मान पर आधारित हैं और देश ने उसकी अखंडता और संप्रभुत्ता को चुनौती देने वाली विरोधी ताकतों को कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने अटूट आत्म-विश्वास और हरसंभव तरीके से ‘आत्मनिर्भर’ बनने के अपने समर्पण से मार्गदर्शित हैं।
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