गृह मंत्रालय ने 1995 में हुई पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है, जबकि आतंकवाद में लिप्त शामिल आठ सिख कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया गया है। बताया जा रहा है कि देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसा इसलिए किया ताकि सिखों के घावों को भरा जा सके और पाकिस्तान की 'K2' (कश्मीर और खालिस्तान) योजना पर पानी फेरा जा सके।
भारत ने शनिवार देर रात घोषणा की कि आतंकवाद के अपराध में शामिल आठ सिख कैदियों को पंजाब की विभिन्न जेलों में रखा गया है उन्हें समय से पहले रिहा किया जाएगा। उनकी रिहाई गुरु नानक देवजी की 550वीं जयंती पर मानवीय आधार को ध्यान में रखकर की जाएगी। इनमें लाल सिंह, दविंदर पाल सिंह भुल्लर, हरजिंदर सिंह, गुरदीप सिंह खेरा, वारिम सिंह, सुभेग सिंह, नंद सिंह और बलराम सिंह का नाम शामिल है।
खबरों के अनुसार, उच्च अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का कदम 2015 से ही पाइपलाइन में था, जिसके बाद इस साल नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा सत्ता में लौटी और इस मुद्दे पर तेजी से अमल किया गया। इसका उद्देश्य सिख समुदाय के घावों को ठीक करना और पंजाब में पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई द्वारा आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के सपने को ध्वस्त करना है।
उनका कहना है कि कश्मीर और पंजाब में लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की आईएसआई की 'के 2' योजना है। इस मामले से परिचित एक अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार ने कश्मीर को विकास के रास्ते पर लाने के लिए धारा 370 को रद्द करने और सिख समुदाय की भावनाओं को आत्मसात करने का जवाब दिया है।
उन्होंने बताया कि सिखों के लिए यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर, इंटेलिजेंस ब्यूरो और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के प्रमुखों के साथ मिलकर उठाया गया।