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11 सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर बिफरीं महबूबा, बोलीं-छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू-कश्मीर के लोगों को निशक्त बना रहा केंद्र

By अभिषेक पारीक | Updated: July 11, 2021 21:43 IST

जम्मू कश्मीर में 11 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संगठनों से जुड़ाव के चलते बर्खास्त कर दिया था। जिसमे हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटे भी शामिल हैं।

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ठळक मुद्दे11 कर्मचारियों की बर्खास्ती को लेकर महबूबा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना। उन्होंने कहा- केंद्र छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू कश्मीर के लोगों को निशक्त बना रहा है। हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों को भी बर्खास्त किया गया है। 

जम्मू कश्मीर में 11 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संगठनों से जुड़ाव के चलते बर्खास्त कर दिया था। जिसमे हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटे भी शामिल हैं। इसे लेकर पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि केंद्र संविधान को रौंदकर छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू कश्मीर के लोगों को निशक्त बना रहा है। 

अपने एक ट्वीट में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने बर्खास्तगी को 'अचानक' उठाया गया कदम करार दिया और कहा कि जम्मू कश्मीर के सभी नीतिगत फैसलों का इकलौता उद्देश्य कश्मीरियों को सजा देना होता है। मुफ्ती ने ट्वीट में कहा कि भारत सरकार लगातार छद्म राष्ट्रवाद की आड़ लेकर जम्मू कश्मीर के लोगों को निशक्त बना रही है। 

महबूबा ने ट्वीट किया, 'भारत सरकार उस संविधान को रौंदकर छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू-कश्मीर के लोगों को निःशक्त बनाना जारी रखे हुए है, जिसे बरकरार रखा जाना चाहिए। तुच्छ आधारों पर 11 सरकारी कर्मचारियों की अचानक बर्खास्तगी अपराध है। जम्मू-कश्मीर के सभी नीतिगत फैसले कश्मीरियों को दंडित करने के एकमात्र उद्देश्य से किए जाते हैं।'

अधिकारियों ने शनिवार को बताया था जम्मू कश्मीर सरकार ने आतकंवादी संगठनों के सहयोगी के रूप में कथित तौर पर काम करने को लेकर हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों और दो पुलिस कर्मियों सहित अपने 11 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

पाकिस्तान में रह रहे हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के बेटों सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ को सरकारी नौकरी से निकाल दिया गया है। दोनों आतंकी फंडिंग में शामिल रहे हैं। सामने आया था कि दोनों हिजबुल के लिए पैसे इकट्ठा करते थे और हवाला के जरिये फंड भी ट्रांसफर करते थे। 

 

 

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