लाइव न्यूज़ :

मायावती की अपनी मूर्तियों पर सुप्रीम कोर्ट में सफाई- 'लोगों की इच्छा का मान रखने के लिए बनाया स्मारक'

By भाषा | Updated: April 2, 2019 15:27 IST

Open in App

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी आदमकद प्रतिमाएं बनाए जाने के कदम का उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को बचाव करते हुए कहा कि ये प्रतिमाएं 'लोगों की इच्छा' जाहिर करती हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय में दिए एक हलफनामे में कहा कि उनकी और अन्य नेताओं की प्रतिमाएं और स्मारक बनाने के पीछे की मंशा 'जनता के बीच विभिन्न संतों, गुरुओं, समाज सुधारकों और नेताओं के मूल्यों एवं आदर्शों का प्रचार करना है ना कि बसपा के चिह्ल का प्रचार या उनका खुद का महिमामंडन' करना है।

मायावती ने अपने हलफनामे में कहा कि उनकी प्रतिमाएं 'लोगों की इच्छा का मान रखने के लिए राज्य विधानसभा की इच्छा' के अनुसार बनवाई गई। उन्होंने कहा कि स्मारकों के निर्माण और प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए निधि बजटीय आवंटन और राज्य विधानसभा की मंजूरी के जरिए स्वीकृत की गई। मायावती ने प्रतिमाओं के निर्माण में सार्वजनिक कोष के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज करने की मांग करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और कानून का घोर उल्लंघन बताया।

उच्चतम न्यायालय ने आठ फरवरी को कहा था कि मायावती को उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर अपनी और पार्टी के चिह्न हाथी की मूतियां लगाने के लिए इस्तेमाल की गई सार्वजनिक कोष सरकारी राजकोष में जमा करानी चाहिए। पीठ ने तब कहा था, 'सुश्री मायावती सारा पैसा वापस करिए। हमारा मानना है कि मायावती को खर्च किए गए सारे पैसे का भुगतान करना चाहिए।' उसने कहा था, 'हमारा फिलहाल मानना है कि मायावती को अपनी और अपनी पार्टी के चिह्न की प्रतिमाओं पर खर्च किया जनता का पैसा सरकारी राजकोष में जमा कराना होगा।' 

शीर्ष न्यायालय 2009 में दायर एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें आरोप लगाया गया कि जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थी तब विभिन्न स्थानों पर उनकी और बसपा के चुनाव चिह्न की प्रतिमाएं लगाने के लिए 2008-09 और 2009-10 के लिए राज्य के बजट से करीब 2,000 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए गए। इसमें दलील दी गई है कि अपनी प्रतिमाएं लगाने और राजनीतिक पार्टी का प्रचार करने के लिए जनता के पैसों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत ने 29 मई 2009 को लखनऊ और नोएडा में पार्कों में अपनी और पार्टी के चिह्न की प्रतिमाएं लगाने के लिए सार्वजनिक कोष के इस्तेमाल के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मायावती को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जनहित याचिका के लंबित रहने के दौरान उच्चतम न्यायालय ने 22 फरवरी 2010 को निर्वाचन आयोग से 2012 के विधानसभा चुनाव के समय सार्वजनिक स्थानों से इन चिह्नों की प्रतिमाएं हटाने की याचिका पर विचार करने के लिए कहा था। आयोग ने सात जनवरी 2012 को राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान मायावती और हाथियों की प्रतिमाओं को ढकने के आदेश दिए थे। भाषा गोला नेत्रपाल शाहिद शाहिद

टॅग्स :मायावतीबहुजन समाज पार्टी (बसपा)
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टमायावती शासनकाल में 60 करोड़ रुपए में डील, हाजी इकबाल की 1000 करोड़ रुपए की तीन चीनी मिल जब्त करेगी ईडी?, बसपा एमएलसी रहे भगोड़ा घोषित

कारोबारNoida International Airport: 31 साल लगे जमीन पर उतरने में?, पीएम मोदी ने पूरा किया, पायलट शशांक शेखर सिंह का सपना?

भारत'बहुजन समाज अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की चाबी हासिल करें': मायावती ने भाजपा, कांग्रेस और सपा पर किया तीखा प्रहार

भारतबसपा संस्थापक कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए?, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा पत्र, यूपी चुनाव 2027 पर कांग्रेस की नजर?

भारतउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027ः कांशीराम की विरासत?, मायावती, अखिलेश यादव, राहुल गांधी और सीएम योगी में सियासी जंग तेज

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया