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मार्जिन राशि बकाया: दिल्ली उच्च न्यायालय ने राशन विक्रेताओं की याचिका पर सरकार का रुख पूछा

By भाषा | Updated: November 23, 2021 18:21 IST

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नयी दिल्ली, 23 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले जुलाई से लंबित बकाया मार्जिन राशि की मांग को लेकर राशन दुकान डीलर्स की याचिका पर मंगलवार को राज्य सरकार का रुख जानना चाहा।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा, 'हमें बताएं कि उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर क्यों किया जाता है?’’

याचिकाकर्ताओं - दिल्ली राशन डीलर्स यूनियन और व्यक्तिगत राशन विक्रेताओं- ने कहा है कि उन्हें पैसे की सख्त जरूरत है और वे उचित मूल्य की दुकानें नहीं चला सकते, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (एनएफएस) अधिनियम के तहत अग्रिम मार्जिन राशि पिछले चार महीनों से नहीं दी गयी है।

याचिका में कहा गया है कि सरकार के निर्देशानुसार लोगों को राशन विक्रेताओं द्वारा आपूर्ति किए गए राशन की मार्जिन राशि का भुगतान न होने के कारण डीलर अपनी बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं कर सकते हैं।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने इस मुद्दे पर निर्देश लेने के लिए कुछ समय मांगा जिसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख मुकर्रर की।

याचिका में कहा गया है कि जुलाई 2021 से दुकान मालिकों को मार्जिन राशि का भुगतान नहीं किया गया है और यह एक बड़ा बकाया हो गया है, जिसके कारण उचित मूल्य दुकान मालिकों के पास यह सेवा प्रदान करने का साधन भी उपलब्ध नहीं है, जिसके वे हकदार हैं। उनके पास किराये की दुकानें हैं और ज्यादातर के पास किराये का भुगतान करने तक के लिए पैसे नहीं हैं।

याचिका के अनुसार, “इसलिए, उचित मूल्य की दुकान के मालिक पैसे की कमी के कारण अपने-अपने परिवारों को बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर सकते हैं। यह एक रिट है जिसमें दिल्ली सरकार को मार्जिन राशि जारी करने के निर्देश की मांग की गई है, जिसका भुगतान करने के लिए वह जिम्मेदार है और जिसका ऐसे राशन विक्रेताओं से वादा भी किया गया था, ताकि उचित मूल्य की दुकानों के मालिक समाज के प्रति अधिक कुशलता से कर्तव्य निभा सकें।’’ याचिका में इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश पारित करने का भी अदालत से अनुरोध किया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि प्रत्येक व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं का कम से कम दो लाख से चार लाख रुपये से अधिक की मार्जिन राशि बकाया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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