मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और विपक्षी दलों के आठ अन्य उम्मीदवार आज (18 मई) दोपहर एक बजे MLC विधान परिषद की सदस्यता की शपथ लेंगे। इसी के साथ महीनों से चल रहे जारी संवैधानिक संकट आज खत्म हो जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के आठ अन्य उम्मीदवारों को गुरुवार को राज्य विधान परिषद के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। ये सभी उम्मीदवार विधान परिषद की उन नौ सीटों के लिए मैदान में थे जो 24 अप्रैल 2020 को खाली हुई थीं।
नौ सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई सीटों को भरने के लिए चार मई को चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी। शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी के कारण चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। प्रदेश के राज्यपाल बी एस कोश्यारी ने हाल ही में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर विधान परिषद के चुनाव कराने का अनुरोध किया था ताकि ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के अंदर विधायिका में निर्वाचित होने के संवैधानिक प्रावधान को पूरा कर सकें।
9 सीटों के लिए 14 उम्मीदवारों नामांकन पत्र किए थे दाखिल
नौ सीटों के लिए 14 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें से कागजों की छानबीन के दौरान एक उम्मीदवार का पर्चा खारिज हो गया, वहीं बीजेपी के अजीत गोपचडे तथा संदीप लेले, राकांपा के किरण पावस्कर और शिवाजीराव गर्जे ने 12 मई को नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद नौ ही उम्मीदवार मैदान में बचे जिनमें शिवसेना से उद्धव ठाकरे और नीलम गोरे, बीजेपी से रणजीत सिंह मोहिते पाटिल, गोपीचंद पाडलकर, अजीत दटके और रमेश कराड हैं। निर्विरोध निर्वाचित होने वाले उम्मीदवारों में राकांपा के शशिकांत शिंदे और अमोल मितकरी तथा कांग्रेस के राजेश राठौड़ भी हैं।
इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल ने शुरुआत में सिफारिश की थी कि राज्यपाल अपने कोटे से ठाकरे को विधान परिषद में मनोनीत करें। दो बार सिफारिश के बावजूद राज्यपाल ने ठाकरे को विधान मंडल के उच्च सदन में मनोनीत नहीं किया जिसकी सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास आघाड़ी के घटक दलों ने आलोचना की। ठाकरे ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात करके उनके हस्तक्षेप की मांग की थी।