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दूध की जगह पी रहे हैं आप जहर? 25 फीसदी से अधिक सैंपल हुए फेल

By एसके गुप्ता | Updated: March 8, 2020 08:01 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) से देश में दूध के नमूनों की जांच कराई है. जांच के लिए 6432 सैंपल लिए गए.

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ठळक मुद्देमिलावटी दूध की जांच के लिए देश के विभिन्न राज्यों से भरे गए 13067 सैंपल में से 4637 सैंपल फेल पाए गए हैं. महाराष्ट्र में दूध के 25 फीसदी से ज्यादा सैंपल फेल हुए हैं.

मिलावटी दूध की जांच के लिए देश के विभिन्न राज्यों से भरे गए 13067 सैंपल में से 4637 सैंपल फेल पाए गए हैं. महाराष्ट्र में दूध के 25 फीसदी से ज्यादा सैंपल फेल हुए हैं. महाराष्ट्र में जांच के लिए 741 सैंपल भरे गए थे, इनमें से 175 सैंपल जांच में फेल हुए हैं. फेल हुए सैंपल में ब्रांडेड कंपिनयों का दूध भी शामिल है. दूध की इस मिलावट से लोगों की सेहत खतरे में हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) से देश में दूध के नमूनों की जांच कराई है. जांच के लिए 6432 सैंपल लिए गए. इनमें से 12 सैंपल ऐसे मिले जिनमें सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक पदार्थ हाइड्रोजन परऑक्साइड, डेटरजेंट, यूरिया और न्यूट्रलाइजर की मिलावट की पुष्टि हुई है. जांच में 368 सैंपल में एफलाटॉक्सिन एम-1 की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई है.

इसके अलावा 77 सैंपल में एंटीबायोटिक्स की सीमा अधिक पाई गई है. जबकि कच्चे दूध के एक सैंपल में पेस्टीसाइड ज्यादा मात्रा में मिला है. चौंकाने वाली बात यह है कि गुणवत्ता के पैरामीटर पर जिन 41 फीसदी सैंपल को सुरक्षित पाया गया है. उनमें वसा, ठोस वसा के कारण घटिया गुणवत्ता वाले मिले हैं. कई सैंपल में पानी की मिलावट ज्यादा मिली है. दूध में इस तरह की मिलावट से कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि दूध में मिलावट को लेकर राज्य स्तर पर कानूनी कार्रवाई की जाती है. सरकार की तरफ से दूध जांच के लिए तकनीकी मशीनें दूध विक्रेताओं के यहां लगाई गई हैं. जिससे वह दूध बेचने से पहले दूध की जांच कर उसका रिकॉर्ड रखें.

खाद्य विभाग के अधिकारी समय-समय पर इन डेयरियों का दूध और रिकॉर्ड जांचते रहते हैं. परिणाम स्वरूप दूध में मिलावट करने वाले 152 लोगों पर आपराधिक मामले और 2635 लोगों पर सिविल केस दर्ज किया गया.

इसके अलावा 1477 लोगों पर 2 करोड़ 99 लाख 24 हजार 460 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। सबसे ज्यादा मिलावट के मामले उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से सामने आए हैं.

 

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