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लोकसभा चुनावः क्या विधानसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी बागी तेवर नुकसान करेंगे बीजेपी का?

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: April 14, 2019 17:20 IST

बीकानेर में तो टिकट वितरण से पहले ही दिग्गज भाजपा नेता रहे देवीसिंह भाटी ने केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को फिर से टिकट दिए जाने की संभावनाओं के मद्देनजर बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था.

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ठळक मुद्देविस चुनाव 2018 से पहले मानवेंद्र सिंह ने पचपदरा में स्वाभिमान रैली की थीविस चुनाव 2018 से पहले मानवेंद्र सिंह ने पचपदरा में स्वाभिमान रैली की थी

राजस्थान विस चुनाव 2018 में बीजेपी ने कई प्रमुख नेताओं के टिकट काट दिए थे, जिनमें से कई बागी होकर चुनाव लड़े. बागी जीत तो नहीं पाए, लेकिन भाजपा के हारने में उनकी बड़ी भूमिका रही.

विस चुनाव के बागी तो हैं ही, अब लोस चुनाव में भी बीकानेर, बाड़मेर जैसे लोस क्षेत्रों में बीजेपी को नए बागियों के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बीकानेर में तो टिकट वितरण से पहले ही दिग्गज भाजपा नेता रहे देवीसिंह भाटी ने केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को फिर से टिकट दिए जाने की संभावनाओं के मद्देनजर बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था. बाद में बीकानेर से टिकट अर्जुनराम मेघवाल को ही दिया गया और अब जाकर देवीसिंह भाटी का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है. जाहिर है, चुनाव में बीजेपी को देवीसिंह भाटी और उनके समर्थकों की नाराजगी का नुकसान होगा.

हालांकि, बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी ने बीकानेर में पत्रकारों से पार्टी में जगह-जगह उभर रहे असंतोष को बीजेपी की लोकतांत्रिक विशेषता बताते हुए कहा था कि- भाजपा प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को मानती है. यहां सभी को अपनी बात कहने की छूट है. देवीसिंह भाटी की बात भी सुनी गई थी, लेकिन उनकी सभी बातों से पार्टी सहमत हो, यह जरूरी नहीं. उन्होंने इस्तीफा दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया.

उधर, बाड़मेर में बीजेपी को इस बात का सियासी खतरा है कि बीजेपी के मौजूदा सांसद कर्नल सोनाराम की नाराजगी पार्टी को भारी ना पड़ जाए. इसीलिए, कर्नल सोनाराम को मनाने की कवायद भी तेज कर दी गई है. उनके कांग्रेस में जाने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं, किन्तु वे क्या निर्णय लेंगे यह अभी भी साफ नहीं है. 

भाजपा ने बाड़मेर में अपने मौजूदा सांसद कर्नल सोनाराम के बजाय बायतू के पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को उम्मीदवार बनाया है. अब, टिकट कटने से नाराज चल रहे कर्नल सोनाराम बीजेपी के विभिन्न कार्यक्रमों से दूरी तो बनाए हुए हैं, लेकिन खुली बगावत करेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है. अलबत्ता, उनकी सियासी उदासीनता ही पार्टी को भारी पड़ेगी.

यह पहला मौका है, जब राजस्थान में बीजेपी के सामने बीजेपी के ही कई दिग्गज नेता कांग्रेस के साथ खड़े हैं.

भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी हैं. यदि कर्नल सोनाराम यहां बीजेपी के खिलाफ जाते हैं, तो बीजेपी के लिए यह सीट बचाना मुश्किल हो जाएगा.

इस क्षेत्र में पीएम नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली करने आ रहे हैं, परन्तु इसे सफल बनाने के लिए पार्टी को पसीना बहाना पड़ रहा है, क्योंकि एक तो कर्नल सोनाराम का आवश्यक सहयोग नहीं मिल रहा है और दूसरा- मौसम की मार ने सियासी रफ्तार को थाम लिया है.

याद रहे, विस चुनाव 2018 से पहले मानवेंद्र सिंह ने पचपदरा में स्वाभिमान रैली की थी, जिसमें- कमल का फूल, हमारी भूल, बताते हुए बीजेपी छोड़ कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था. विस चुनाव में वसुंधरा राजे को घेरने के मकसद से मानवेंद्र सिंह को उनके सामने कांग्रेस से उम्मीदवार बनाया गया था. हालांकि, वे हार गए थे, किन्तु कांग्रेस ने उन्हें इसके लिए सम्मान देते हुए लोस चुनाव में बाड़मेर-जैसलमेर से टिकट दिया है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी के नए-पुराने बागी लोस चुनाव में पार्टी की मुश्किलें जरूर बढ़ाएंगे, खासकर बाड़मेर, बांसवाड़ा-डूंगरपुर, दौसा, करौली-धौलपुर जैसे उन लोस क्षेत्रों में जहां पिछली बार पार्टी ने एक लाख से भी कम वोटों से जीत दर्ज करवाई थी.

टॅग्स :लोकसभा चुनावभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)राजस्थान लोकसभा चुनाव 2019कांग्रेस
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