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Lok Sabha Elections 2024: महाराष्ट्र में सियासी भूचाल, उद्धव गुट ने ठोंका 23 सीटों पर दावा, कहा- 'बची 25 सीटें शरद पवार और कांग्रेस आपस में बांट लें'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: December 29, 2023 07:09 IST

शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा की कुल 48 सीटों में से 23 पर अपना दावा ठोकते हुए 25 सीटें शरद पवार की पार्टी एनसीपी और कांग्रेस के लिए छोड़ने की बात कही है।

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ठळक मुद्देएमवीए गठबंधन के तीनों दलों के बीच लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी शुरूशिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा की कुल 48 सीटों में से 23 पर अपना दावा ठोंकाकहा बची हुई 25 सीटें शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस आपस में बांट लें

मुंबई: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी (एमवीए) खेमे में भारी खिंचतान शुरू हो गई है। एमवीए की प्रमुख घटक दल शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा की कुल 48 सीटों में से 23 पर अपना दावा ठोकते हुए 25 सीटें शरद पवार की पार्टी एनसीपी और कांग्रेस के लिए छोड़ने की बात कही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार एमवीए गठबंधन के तीनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। इस संबंध में कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने बीते गुरुवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे का मुद्दा पार्टियों के बीच आंतरिक चर्चा के बाद सुलझाया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण ने कहा, "महाराष्ट्र में सीट बंटवारे को लेकर एमवीए के दलों की कल आंतरिक चर्चा है, उसके बाद ही हम अन्य दलों से बात करेंगे।"

शिवसेना उद्धव गुट द्वारा 23 सीटों की मांग पर अशोक चव्हाण ने कहा, "यह उनकी इच्छा हो सकती है, हम कोई भी फैसला आपसी बातचीत के बाद करेंगे।"

दिलचस्प बात यह है कि इस विषय के उठने से पहले कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि देश और महाराष्ट्र के सियासी हालात अब बदल गए हैं, इसलिए शिवसेना को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा एक जटिल विषय है। इस बारे में निर्णय इतनी आसानी से नहीं लिया जा सकता है। अगर इंडिया ब्लॉक में सभी दलों को एक साथ लड़ने और बीजेपी को हराने की जरूरत है तो हमें अंदरूनी कलह को रोकने की जरूरत है।"

कांग्रेस नेता निरुपम ने कहा, "मुझे अखबार से पता चला कि शिवसेना ने एमवीए में अकेले 23 सीटों की मांग की है, जो बहुत ज्यादा है।''

उन्होंने कहा, "अब स्थिति बदल गई है। शिवसेना को इस बारे में सोचना चाहिए। सच्चाई यह है कि पिछले वर्ष ही शिवसेना को विभाजन का सामना करना पड़ा और कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। यही स्थिति लगभग एनसीपी के भी साथ है।"

मालूम हो कि साल 2019 में अविभाजित शिवसेना बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी अब महाविकास अघाड़ी (एमवीए) का हिस्सा है, जिसमें कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सहयोगी हैं।

इसके बाद जून 2022 में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने 40 अन्य विधायकों के साथ पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया और भाजपा में शामिल हो गए, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी।

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