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सियासतः कर्नाटक का राजनीतिक नाटक? ये तो होना ही था!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: July 7, 2019 19:45 IST

कांग्रेस-जेडीएस के 13 एमएलए के इस्तीफे के साथ ही कर्नाटक विधानसभा में वर्तमान संख्याबल भी कुमारस्वामी से दूर होता नजर आ रहा है.

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कर्नाटक में सत्ता का खेल क्रिकेट की तरह हो गया है. जिस तरह हर ओवर के साथ हार-जीत के लिए लक्ष्य बदल जाते हैं, वैसे ही कर्नाटक में हर इस्तीफे के साथ सियासी समीकरण बदल रहा है, जिसके कारण एचडी कुमारस्वामी सरकार एक बार फिर गहरे संकट से जूझ रही है. 

कांग्रेस-जेडीएस के 13 एमएलए के इस्तीफे के साथ ही कर्नाटक विधानसभा में वर्तमान संख्याबल भी कुमारस्वामी से दूर होता नजर आ रहा है. आनंद सिंह सहित इस्तीफा देने वाले विधायकों की संख्या 14 हो जाती है. इस वक्त का राजनीतिक हिसाब लगाएं तो भाजपा और कांग्रेस-जेडीएस एमएलए की संख्या बराबर हो गई है. जाहिर है, नंबर गेम में एक्सपर्ट बीजेपी जल्दी ही कर्नाटक की सत्ता पर कब्जा कर सकती है. 

वैसे तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन एक राजनीतिक मजबूरी के चलते बना था. कांग्रेस, बीजेपी को सत्ता से दूर रखना चाहती थी, लिहाजा यह गठबंधन बना और कम एमएलए होने के बावजूद कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बन गए. 

जहां केन्द्रीय कांग्रेस के नेताओं की नजर उस वक्त भाजपा को प्रदेश की सत्ता से दूर रखने के साथ-साथ आने वाले लोकसभा चुनाव पर थी, वहीं प्रदेश के कांग्रेसी नेता अपनी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं पर फोकस थे. इसीलिए लोकसभा चुनाव तक भी इस गठबंधन को बनाए रखना कांग्रेस के लिए मुश्किल होता गया था. नतीजा यह रहा कि लोकसभा चुनाव में भी इस गठबंधन को नाकामयाबी ही मिली.

दरअसल, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन एक तरह का तेल-पानी सियासी गठबंधन है, जिसे लंबे समय तक चलाना बेहद मुश्किल है और इसीलिए भाजपा लगातार वहां राजनीतिक जोड़तोड़ में लगी है.

कांग्रेस और जेडीएस विधायकों के त्यागपत्र से पहले तक कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के पास 118 विधायकों का समर्थन था, जिसमें कांग्रेस के 79, जेडीएस के 37 और दो निर्दलीय विधायक शामिल थे, जहां 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में यह बहुमत के आंकड़े 113 से 5 अधिक था, लेकिन अब विधायकों के इस्तीफों के बाद 211 सदस्यों के साथ ही यह घटकर 106 पर पहुंच गया है.

बीजेपी के पास कुल 105 विधायक हैं और वह इस वक्त सबसे बड़ा दल है, जबकि जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन और निर्दलीय विधायकों का कुल आंकड़ा भी 105 ही है, जिसमें कांग्रेस-69, जेडीएस-34 और निर्दलीय-2 विधायक हैं. 

स्पष्ट है, विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होते ही सियासी जोड़तोड़ में एक्सपर्ट बीजेपी कि लिए प्रदेश की सत्ता पर कब्जा जमाना एकदम आसान हो जाएगा. प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं की राजनीतिक महत्वकांक्षाएं, बीजेपी के कर्नाटक की सत्ता के सपने को साकार कर सकतीं हैं!

टॅग्स :कर्नाटककांग्रेसजनता दल (सेकुलर)
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