karnataka elections: SC hearing on karnataka bs yeddyurappa floor test in inside story | इनसाइड स्टोरी, येदियुरप्पा के बहुमत परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी और कांग्रेस ने रखीं ये दलीलें

नई दिल्ली, 18 मई: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के 32वें सीएम बीएस येदियुरप्पा को विधान सभा में बहुमत साबित करने के लिए शनिवार (19 मई) साम चार बजे का वक्त दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी के उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कम से कम सोमवार तक का वक्त माँगा था। यानी कल शाम चार बजे तक फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा। इस फ्लोर टेस्ट में जो पार्टी बहुमत साबित करेगी, वह सरकार बनाएगी। 12 मई को कर्नाटक विधानसभा के 222 सीटों पर चुनाव हुए थे। 15 मई को आए नतीजों में बीजेपी को -104, कांग्रेस -78 जेडीएस- 37+बसपा- 1( 116), निर्दलीय-2, केपी जनता पार्टी- 1 सीट मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बेंच के सामने बीजेपी और कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में दलीलें रखी गईं। सबसे पहले बीजेपी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को वह लेटर उपलब्ध कराया गया जिसे येदियुरप्पा की तरफ से राज्यपाल को भेजा गया था। आइए आपको बताते हैं कर्नाटक के मेगा पॉलिटिकल ड्रामा पर कोर्ट रूप में आज क्या-क्या दलीले रखी गई... 

-  पहले  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वकील मुकुल रोहतगी ने अपनी दलील रखते हुए  सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि सबसे बड़ा दल होने के नाते बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दिया गया। जस्टिस सीकरी ने मुकुल रोहतगी की दलील पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यहाँ इसी पर विचार हो रहा है कि किसे सरकार बनाने का पहले मौका दिया जाना चाहिए था?

- मामले की सुनवाई जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसके बोबड़े और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रोहतगी से ये भी पूछा कि दोनों पक्ष यहाँ मौजूद हैं तो क्यों न कल ही बहुमत परीक्षण करा दिया जाए। 

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 - बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस विधायकों से समर्थन मिलेगा और इस मौके पर मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता हूं। 

- कांग्रेस वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने माँग की है कि बहुमत परीक्षण की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एंग्लो-इंडियन सदस्य के मनोनित किए जाने पर रोक लगा दी है।  कोर्ट ने सभी विधायकों को सुरक्षा दिए जाने के भी बात कह चुका है। कर्नाटक सरकार की तरफ से पेश तुषार मेहता ने कहा कि कांग्रेस-जेडीएस ने सरकार बनाने का दावा नहीं पेश किया था इन्होंने बस अपने समर्थन वाले विधायकों के नाम दिये थे।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि आखिरकार यह नंबर गेम और राज्यपाल को देखना है कि किस दल के बहुमत का समर्थन है। राज्यपाल को पहले खुद को संतुष्ट करना है। 

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि येदियुरप्पा को सरका बनाने का बुलावा देने के राज्यपाल के फैसले की वैधानिकता में जाने से बेहतर यह है कि आगे और मौका दिए जाने की बजाय शनिवार को फ्लोर टेस्ट कराया जाए। 

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कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने 16 मई देर शाम बीएस येदियुरप्पा का सरकार बनाने का न्योता दिया था। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता देने के खिलाफ कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) 16 मई देर रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने आधी रात को मामले पर सुनवाई करते हुए शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बीएस येदियुरप्पा द्वारा राज्यपाल को 15 मई और 16 मई को सौंपे गये पत्र गुरुवार को सर्वोच्च अदालत में जमा करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (18 मई) को नियत की थी। येदियुरप्पा ने गुरुवार (17 मई) को सुबह नौ बजे राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस नेता सिद्धारमैया और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने बेंगलुरु स्थित राजभवन के बाहर प्रदर्शन किया। सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके गठबंधन के 118 विधायक राजभवन के बाहर मौजूद हैं। 17 मई रात को कांग्रेस और  जेडीएस के विधायकों को हैदराबाद ले जाया गया।  

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