karnatak hung assembly a governor roll in Froming govt vasubhai vala | 7 मौके जब राज्यपाल के एक फैसले ने बदल दी सरकार, किसी की आधी रात को गई कुर्सी, कोई अमेरिका में करा रहा था इलाज

नई दिल्ली, 16 मईः कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद सरकार बनाने को लेकर ऊहापोह की स्‍थ‌िति बनी हुई है। बात राज्यपाल वासुभाई वाला पर अटकी है कि वे किसी सरकार बनाने का मौका देते हैं। 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है। जबकि कांग्रेस का समर्थन प्राप्त जनता दल सेक्यूलर कांग्रेस का समर्थन हासिल करके स्पष्ट बहुमत होने का दावा किया है और सरकार बनाने के लिए राज्यपाल की अनुमति की राह तक रहे हैं। गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री व विधानसभा स्पीकर रह चुके वजुभाई वाला ने अभी तक किसी भी दल को सरकार को बनाने का न्योता नहीं दिया है।

संविधान के अनुसार राज्यपाल संघीय व्यवस्‍था में केंद्र और राष्ट्रपति के प्रतिनिध‌ि होते हैं। ये राज्यों में स्‍थाई सरकार बनवाने में अहम भूमिका अदा करते हैं। हालांकि केंद्र सरकार बदलते ही राज्यपालों की नियुक्ति और स्‍‌थानंतरण कई बार चर्चा में रहते हैं। कई बार राज्य सरकारें राज्यपाल-उपराज्यपाल पर केंद्र सरकार का पक्ष लेने का आरोप लगते हैं। ऐसे मामले रहे हैं जिनमें आधी रात को राज्यपालों ने सरकार गिराई है, तो कभी सीएम के अमेरिका जाने पर सत्ता पलट दी है। कर्नाटक में राज्यपालों की भूमिकाएं पहले भी आती रही हैं विवादों में-

आइए, ऐसे में एक बार इतिहास के पन्नों से उन राज्यपालों को खंगालते हैं जिन्होंने राज्यों में सरकार बनाने-बिगड़ने में प्रमुख भूमिका निभाई है।

1- कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर चर्चा में आए थे रोमेश भंडारी

राज्यपाल के सरकार बनाने-बिगाड़ने के मामले में उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार की साल 1998 में हुई बर्खास्तगी भी खूब सुर्खियों में रही थी। राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ कल्याण सिंह इलाहाबाद हाई कोर्ट गए। कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधिक करार दिया। तब दो दिन के भीतर नवनियुक्त मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल को पद छोड़ना पड़ा।

2- गणपतराव देवजी तापसे पर लगा था भजनलाल की सरकार बनवाने का आरोप

जीडी तापसे 1980 के दशक में हरियाणा के राज्यपाल रहे। उन‌ दिनों हरियाणा में देवीलाल की सरकार थी। लेकिन 1982 में भजनलाल की पार्टी में देवीलाल के कई विधायक शामिल हो गए। इसके बाद राज्यपाल ने भजनलाल को राज्य में सरकार बनाने का निमंत्रण भेज दिया। तब देवीलाल ने राज्यपाल पर भजनलाल का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

3- बहुमत की सरकार को बर्खास्त कर दिया था ठाकुर रामलाल ने

वर्ष 1983 में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ठाकुर रामलाल थे। उन्होंने बहुमत की सरकार चला रहे एनटी रामराव को बर्खास्त कर दिया। उस वक्त एनटी रामाराव हार्ट सर्जरी के लिए अमेरिका गए हुए थे। लौटने पर पता चला कि उन्हीं के सरकार के वित्त मंत्री एन भास्कर राव मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लौटते ही रामाराव विद्रोह किया। आखिरकार वहां राज्यपाल के बदले गए। तब नये राज्यपाल शंकर दयाल शर्मा ने आते ही एनटी रामाराव को सत्ता सौंप दी।

4- राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी की ओर नियुक्त सीएम नहीं साबित कर पाए बहुमत

झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने साल 2005 के झारखंड चुनावों के बाद त्रिशंकु विधानसभा में शिबू सोरेन की सरकार बनवाई। लेकिन इसके बाद सदन में वे बहुमत साबित करने में असफल रहे। उन्हें नौ दिनों की मुख्यमंत्री पद भी गंवाना पड़ा। बाद में अर्जुन मुंडा की सरकार बनी।

5- आधी रात को राज्यपाल बूटा सिंह ने भंग की थी विधानसभा

यह मामला साल 2005 का ही है। तब ‌बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह हुआ करते थे। उन्होंने 22 मई, 2005 की आधी रात को राज्य में विधायकों की खरीदफरोख्त रोकने का हवाला देते हुए विधानसभा भंग कर दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बूटा सिंह के फैसले को असंवैधिक करार दिया।

6- कर्नाटक में राज्यपाल ने बर्खास्त की थी सरकार

कर्नाटक साल 1952 से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। लेकिन पहली बार साल 1983 में यह जनता पार्टी ने सेंध लगाई। जब रामकृष्ण हेगड़े की सरकार बनी। लेकिन हेगड़े के एक टेलीफोन टैपिंग मामले में फंसने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा उनके बाद एसआर बोम्मई ने सीएम की गद्दी संभाली। लेकिन तत्कालीन राज्यपाल पी वेंकटसुबैया ने बोम्मई को बर्खास्त कर दिया। राज्यपाल ने स्वविवेक से कहा कि बोम्मई सरकार विधानसभा में बहुमत खो चुकी है।

तब बोम्मई राज्यपाल के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में गए। कोर्ट ने बोम्मई के पक्ष में फैसला दिया और वे फिर से मुख्यमंत्री बने। तब कोर्ट ने राज्यपाल को सलाह देते हुए कहा था- बहुमत का फैसला सदन में होना चाहिए, कहीं और नहीं।

7- कर्नाटक के राज्यपाल का सरकार में हस्तक्षेप हंसराज भारद्वाज

कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने साल 2009 में बीजेपी सरकार को बर्खास्त कर दिया था। तब केंद्र यूपीए की सरकार थी। कभी यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हंश भारद्वाज की नियुक्त‌ि यूपीए सरकार ने ही की थी। राज्यपाल ने तब बीएस येदियुरप्पा पर गलत तरीके से बहुमत हासिल करने के आरोप लगाते हुए उन्हें दोबारा बहुमत साबित करने को कहा था।