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“एक भविष्यवाणी सच होती दिख रही है, आम्रपाली मामला मुझे जल्द छोड़ने वाला नहीं है”, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने ऐसा क्यों कहा, जानें

By भाषा | Updated: August 22, 2022 21:58 IST

भारत के नामित प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित 27 अगस्त को भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे और वे अगली बार तीन सितंबर (शनिवार) को आम्रपाली मामले की सुनवाई सुबह साढ़े 10 बजे से दोपहर एक बजे तक करेंगे। हालांकि, इस दिन शीर्ष अदालत में छुट्टी होती है।

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ठळक मुद्देपूर्व निदेशक शिव प्रिय को उनकी 13 वर्षीय बेटी के इलाज के लिए चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है।स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे अन्यथा उनकी जमानत जब्त करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।ऐसा लगता है कि अधिवक्ता एमएल लाहोटी द्वारा व्यक्त की गई भविष्यवाणी सच हो रही है।

नई दिल्लीः भारत के नामित प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने सोमवार को कहा कि “एक भविष्यवाणी सच होती दिख रही है। आम्रपाली मामला मुझे जल्द छोड़ने वाला नहीं है।”

न्यायमूर्ति ललित 27 अगस्त को भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे और वे अगली बार तीन सितंबर (शनिवार) को आम्रपाली मामले की सुनवाई सुबह साढ़े 10 बजे से दोपहर एक बजे तक करेंगे। हालांकि, इस दिन शीर्ष अदालत में छुट्टी होती है।

आम्रपाली मामले की सुनवाई करने वाली न्यायमूर्ति ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की एक विशेष पीठ ने पूर्व निदेशक शिव प्रिय को उनकी 13 वर्षीय बेटी के इलाज के लिए चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है।

पीठ ने कहा कि धन शोधन समेत अन्य आरोपों का सामना कर रहे प्रिय चार सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर या उससे पहले आत्मसमर्पण करेंगे और अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे अन्यथा उनकी जमानत जब्त करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मार्च 2018 से आम्रपाली मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति ललित ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि अधिवक्ता एमएल लाहोटी द्वारा व्यक्त की गई भविष्यवाणी सच हो रही है। यह आम्रपाली मामला मुझे जल्द छोड़ने वाला नहीं है।’’

इस मामले में घर खरीदारों की ओर से पेश लाहोटी ने कुछ हफ्ते पहले आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ललित से कहा था, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि यह मामला वर्ष 2017 में अदालत संख्या एक (प्रधान न्यायाधीश की अदालत) से शुरू हुआ था। अब 2022 में अदालत संख्या एक में ही समाप्त होगा।’’ 

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