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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना, 144 किशोरों को हिरासत में लिया गया, अधिकतर पर अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुई कार्रवाई

By रामदीप मिश्रा | Updated: October 2, 2019 07:55 IST

चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एनाक्षी गांगुली और संता सिन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जेजे कमेटी से कहा था कि वह उन आरोपों पर गौर करे, जिनमें बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और रिपोर्ट सौंपे।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9 साल से 17 साल के बीच की उम्र के 144 किशोरों हिरासत में लिया गया है।ज्यादातर किशोरों को प्रदेश से हटाए गए अनुच्छेद 370 को लेकर लगे प्रतिबंध के दौरान गिरफ्तार किया गया। 

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9 साल से 17 साल के बीच की उम्र के 144 किशोरों हिरासत में लिया गया है। ज्यादातर किशोरों को प्रदेश से हटाए गए अनुच्छेद 370 को लेकर लगे प्रतिबंध के दौरान गिरफ्तार किया गया। 

इनमें से 142 किशोरों को पहले ही रिहा किया जा चुका था और केवल दो किशोर को अभी भी जुवेनाइल होम्स में हैं। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि यह जानकारी पुलिस और अन्य राज्य एजेंसियों द्वारा दी गई है।

बता दें कि चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एनाक्षी गांगुली और संता सिन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जेजे कमेटी से कहा था कि वह उन आरोपों पर गौर करे, जिनमें बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और रिपोर्ट सौंपे।

इसके बाद न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे की अध्यक्षता वाली समिति ने राज्य एजेंसियों के साथ-साथ अधीनस्थ अदालतों से रिपोर्ट मांगी थी। समिति को राज्य डीजीपी की रिपोर्ट ने किसी भी बच्चे के अवैध हिरासत के आरोपों से इनकार किया। इसमें कहा गया कि किसी भी बच्चे को पुलिस अधिकारियों द्वारा अवैध हिरासत में नहीं रखा गया है। अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

जेजे समिति ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि उसे किसी भी किशोर की कथित हिरासत पर कोई याचिका नहीं मिली है, लेकिन इसके साथ ही हाईकोर्ट में कुछ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं भी थीं, जिसमें बंदियों के किशोर होने की बात कही गई।

आपको बता दें, देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था, जिसके बाद कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल सेवा से लेकर कई प्रतिबंध लगाए ताकि किसी भी तरह से असमाजिक तत्व सूबे में कोई उपद्रव न करें। 

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