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Jammu and Kashmir: पहलगाम नरसंहार के बाद अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की खातिर सेना का सारा जोर होगा दक्षिण कश्मीर में

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: May 3, 2025 20:58 IST

रक्षा सूत्रों ने माना है कि 3 जुलाई से आरंभ होने जा रही अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने हजारों सैनिकों को दक्षिण कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में व्याप्क तलाशी अभियान आरंभ करने की तैयारी करने को कहा गया है। इन अभियानों का लक्ष्य ‘तलाश करो और मार डालो’ ही होगा। 

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जम्मू: पहलगाम नरसंहार के उपरांत खुफिया अधिकारियों द्वारा आने वाले दिनों में दक्षिण कश्मीर में आतंकी हमले तेज होने की चेतावनी दी जा रही है। ऐसे में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा चिंता का कारण बनती जा रही है क्योंकि यह दक्षिण कश्मीर में ही संपन्न होती है। अतः इसे फूल प्रूफ बनाने को सेना भी पूरी तरह से मैदान में उतरने की तैयारी में है। उसका सारा जोर दक्षिण कश्मीर में होगा जहां अमरनाथ यात्रा में शामिल होने वाले लाखों श्रद्धालु आएंगें और चिंता की बात यह है कि ताजा आतंकी हमलों, आतंकी गतिविधियों तथा पत्थरबाजों का गढ़ भी हमेशा दक्षिण कश्मीर ही रहा है।

रक्षा सूत्रों ने माना है कि 3 जुलाई से आरंभ होने जा रही अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने हजारों सैनिकों को दक्षिण कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में व्याप्क तलाशी अभियान आरंभ करने की तैयारी करने को कहा गया है। इन अभियानों का लक्ष्य ‘तलाश करो और मार डालो’ ही होगा। 

अभी तक यही होता आया था कि सेना अमरनाथ यात्रा की शुरूआत से पहले आतंकियों को क्षेत्र से भगाने का अभियान छेड़ती थी लेकिन अब रणनीति को बदल दिया गया है। अगर रक्षाधिकारियों की मानें तो दक्षिण कश्मीर समेत अन्य इलाकों में तेज होते आतंकी हमले आतंकियों की उस हताशा का परिणाम था जो सेना के ‘तलाश करो और मार डालो’ अभियान से उनमें फैली हुई है। 

खबरों के मुताबिक, अमरनाथ गुफा के रास्तों पर सेना के जवानों की तैनाती का कार्य विपरीत मौसम के बावजूद इस बार जल्दी ही आरंभ हो जाएगा। और सेना तैनाती से पूर्व क्षेत्र को आतंकियों से मुक्त कर लेना चाहती है। पहलगाम नरसंहार के उपरांत यह खतरा और इसलिए बढ़ गया है क्योंकि कहा यह जा रहा है कि पहलगाम नरसंहार के दोषी अभी भी दक्षिण कश्मीर में ही छुपे हुए हैं।

वैसे अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की खातिर सेना की तैनाती आधिकारिक तौर पर नहीं होगी। सेनाधिकारी कहते हैं कि उनके पास यात्रा के बाहरी इलाकों की सुरक्षा का भार हमेशा की तरह रहेगा। पर सूत्रों के अनुसार, अन्य सुरक्षाबलों को इस बार भी खतरे को भांपते हुए सेना की कमान के तहत ही अमरनाथ यात्रा में कार्य करना होगा।

आधिकारिक तौर पर 70 हजार से अधिक अर्द्ध सैनिक बलों को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की खातिर तैनात किया जाएगा। इनमें सेना के जवानों की गिनती नहीं होगी और न ही प्रदेश पुलिस के जवानों की। सभी को अगर मिला लिया जाए तो अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की खातिर तैनात किए जाने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या एक लाख से अधिक रहेगी। इनकी तैनाती लखनपुर के प्रवेश द्वार से लेकर अमरनाथ गुफा तक के रास्तों पर होगी।

इतने जवानों की तैनाती के बाद भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर चिंता हमेशा प्रकट की जाती है। खासकर ताजा टारगेट किलिंग वाले हमलों के बाद। दरअसल पाकिस्तान और आतंकी बौखलाहट में हैं। एलओसी और सीमा पर घुसपैठ के प्रयासों को असफल किया जा रहा है और कश्मीर वादी में आतंकियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। 

ऐसे में आतंकियों पर उस पार से कुछ बड़ा करने का दबाव बना हुआ है। जबकि डर यह है कि आतंकियों का साथ देने को एक बार फिर पत्थरबाजों की फौज भी उनके साथ हथियार उठा कर मैदान में आ सकती है जिस कारण सुरक्षाबलों पर दोहरा भार आन पड़ा है। जबकि आशंका यह है कि पहलगाम नरसंहार जैसी घटनाओं की भी पुनर्रावृत्ति हो सकती है।

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