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संतोष देसाई का ब्लॉगः भाजपा के लिए महाराष्ट्र के सबक

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 9, 2019 12:48 IST

नोटबंदी के नुकसानदेह प्रयोग के साथ-साथ कृषि संकट ने उन लोगों को चोट पहुंचाई है जो अर्थव्यवस्था के लिए वास्तविक आर्थिक इंजन के रूप में काम करते हैं. ऐसा नहीं है कि इस मुद्दे को हल करने के लिए सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन उनमें दीर्घकालिक दृष्टि और सुसंगत योजना का अभाव दिखाई देता है.

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संतोष देसाई महाराष्ट्र में सत्ता का नुकसान निश्चित रूप से भाजपा के लिए एक झटका है. आम चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली भाजपा का कई राज्यों में औसत प्रदर्शन हैरान करने वाला है. खासकर तब जब विपक्ष की ओर से उसके सामने कोई विशेष चुनौती नहीं है. एक समय था जब क्षेत्रीय दलों के उद्भव ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं के उभरने का संकेत दिया था, लेकिन वर्तमान में कहीं भी ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता.

इसका मतलब है कि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी के सामने जो समस्याएं हैं वे उसकी ही देन हैं. सबसे स्पष्ट  मुद्दा यह है कि आर्थिक विकास दीर्घावधि की गिरावट का सामना कर रहा है. जीडीपी के नवीनतम आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं. इस बार की मंदी के बारे में विचलित करने वाली बात ये है कि यह आबादी के सबसे कमजोर वर्गो के आसपास केंद्रित है. 

नोटबंदी के नुकसानदेह प्रयोग के साथ-साथ कृषि संकट ने उन लोगों को चोट पहुंचाई है जो अर्थव्यवस्था के लिए वास्तविक आर्थिक इंजन के रूप में काम करते हैं. ऐसा नहीं है कि इस मुद्दे को हल करने के लिए सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन उनमें दीर्घकालिक दृष्टि और सुसंगत योजना का अभाव दिखाई देता है. उद्योगों को भी ऐसा महसूस हो रहा है कि अर्थव्यवस्था इस सरकार के एजेंडे में सबसे महत्वपूर्ण नहीं है. वह अन्य क्षेत्रों में अपनी सफलताओं को गिनाती है.

एक अन्य पहलू, जो महाराष्ट्र के अनुभव से उभरता है, वह है भाजपा को सहयोगी दलों से पेश आने वाली मुश्किलें. चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना के साथ आने वाली परेशानी को दूर किया जाना चाहिए था. ऐसा लगता है कि अति आत्मविश्वास में पार्टी ने सहयोगी दलों  की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. कई राज्यों के विधानसभा चुनाव आगे भी भाजपा की क्षमता का परीक्षण करेंगे. यदि अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट जारी रही और पार्टी मानती रही कि उसके सांस्कृतिक एजेंडे की वजह से ही लोग उसे राज्य स्तर पर भी वोट देते हैं तो पार्टी को आगे और भी बुरी खबरें मिल सकती हैं.

टॅग्स :भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)महाभारत
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