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ओडिशा में विपक्षी दलों के विधायकों विस अध्यक्ष का उनके कक्ष में किया घेराव

By भाषा | Updated: September 8, 2021 16:45 IST

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भुवनेश्वर, आठ सितंबर ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष एसएन पात्रो के बुधवार को सदन में भारी हंगामे के कारण कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थिगत करने के बाद विपक्षी भाजपा तथा कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा स्थित उनके कक्ष में उनका घेराव किया।

विधानसभा में दिन के दौरान खूब शोर-शराबा हुआ। दोनों दल के विधायक कथित खनन अनियमितताओं पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करने के अध्यक्ष के फैसले का विरोध करते हुए, उनके आसन के समीप आ गए थे।

विधानसभा में सुबह 10:30 बजे प्रश्नकाल शुरू होते ही, कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता नरसिंह मिश्रा ने अध्यक्ष से खनन अनियमितताओं पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने की अपील की।

हालांकि अध्यक्ष ने उनकी मांग खारिज कर दी, जिसके बाद कांग्रेस तथा भाजपा के सदस्य उनके आसन के करीब आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने 11:30 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।

इसके बाद दोनों पार्टी के सदस्यों ने अपनी मांग मनवाने के लिए अध्यक्ष का उनके कक्ष में घेराव किया। ऐसे में पात्रो अपने कक्ष में ही रहे और उपाध्यक्ष रजनीकांत सिंह ने 11:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू की और फिर शाम चार बजे तक के लिए उसे स्थगित कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ नरसिंह मिश्रा के नेतृत्व में विपक्षी दलों के विधायक मेरे कक्ष में आए और उन्होंने मुझसे खनन संबंधी मुद्दे पर चर्चा कराने की अनुमति देने को कहा। कोष पीठ के सदस्य भी वहां मौजूद थे। मैंने उन्हें समझाया कि आखिर मैंने उनका स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार क्यों किया है और उनसे शून्य काल में मुद्दा उठाने के लिये कहा, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे।’’

विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा किए गए हंगामे की निंदा करते हुए बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ विधायक पीके देब ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे विधायकों ने एक ऐसे विषय पर हंगामा किया, जो अब ‘‘सुर्खियों’’ में नहीं है।

पिछले एक दशक में राज्य में कई खनन घोटाले सामने आए हैं।

मिश्रा ने दावा किया कि ऐसे मामले अब भी प्रासंगिक हैं और उन पर चर्चा शुरू करने में कोई बुराई नहीं है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मामले पर चर्चा से बचना चाहती है।

भाजपा के मुख्यसचेतक मोहन माझी ने कहा, ‘‘ अब यह स्पष्ट है कि सरकार खनन माफिया की मिलीभगत से राज्य के खनिज संसाधनों को लूट रही है। सरकार पारदर्शी होती तो चर्चा के लिए राजी हो जाती। सदन में चर्चा से बचने की कोई और वजह नहीं हो सकती।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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