Improve infrastructure by taking lessons from Cyclone Amphan, focus on tackling disaster: NDRF chief | ‘अम्फान’ को लेकर बोले एनडीआरएफ प्रमुख- चक्रवात से सबक लेकर आधारभूत संरचना को बेहतर करें, आपदा से निपटने पर ध्यान दें
खासकर तटवर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को बेहतर बनाकर ही जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। (फाइल फोटो)

Highlightsतूफानी हवाओं और जोरदार बारिश के कारण कच्चे मकान गिर गए। हजारों पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुंचा।प्रधान ने बताया कि पश्चिम बंगाल के आपदा प्रभावित जिलों में सड़कों से मलबा हटाने का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।

कोलकाता:एनडीआरएफ के प्रमुख एस एन प्रधान ने कहा है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों में तबाही मचाने वाले चक्रवात ‘अम्फान’ से सबक मिला है कि राज्य ग्रामीण इलाकों में आधारभूत संरचना को बेहतर बनाएं और आपदा से निपटने को शीर्ष प्राथमिकता में रखे। प्रधान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के साथ प्राकृतिक आपदा अब अक्सर हो रही हैं। खासकर तटवर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को बेहतर बनाकर ही जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि चक्रवात ‘अम्फान’ से यह सीख मिली है कि हम और जोखिम नहीं ले सकते । गांवों में खासकर तटीय क्षेत्रों में चक्रवात रोधी ढांचे बनाने होंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी आवास योजनाओं में चक्रवात रोधी डिजाइन को शामिल करना होगा। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक ने एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा को बताया कि ग्रामीण और तटीय स्थानों पर भूमिगत बिजली लाइन डालने की जरूरत है। पश्चिम बंगाल में चक्रवात ‘अम्फान’ के कारण 86 लोगों की मौत हो गयी और लाखों लोग बेघर हो गए। 

तूफानी हवाओं और जोरदार बारिश के कारण कच्चे मकान गिर गए। हजारों पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुंचा। पड़ोसी राज्य ओडिशा के तटीय जिलों में 45 लाख लोग इस चक्रवात से प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में मकानों को नुकसान हुआ। प्रधान ने बताया कि पश्चिम बंगाल के आपदा प्रभावित जिलों में सड़कों से मलबा हटाने का 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। राज्य में एनडीआरएफ की कुल 38 टीमें काम में जुटी हैं। कोलकाता में 19 टीमें काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और पास के कस्बों से जोड़ने वाली सड़कों से मलबा हटा दिया गया है। 

दक्षिण 24 परगना जिले में भी सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बहाल हो गयी है। हालांकि ग्रामीण इलाके में कच्चे मकानों के पुनर्निर्माण में समय लगेगा। एनडीआरएफ के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आश्रय स्थलों से लोग अब वापस लौट रहे हैं और अपने मकानों को ठीक कर रहे हैं। प्रधान ने बताया कि एनडीआरएफ की कुछ टीमों को ग्रामीण इलाके से कोलकाता के लिए रवाना किया गया है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से बिजली और पेयजल आपूर्ति ठप होने के कारण कोलकाता के कुछ भागों में लोगों ने प्रदर्शन किया है। 

उन्होंने कहा कि एक दो दिनों में राज्य में जन-जीवन सामान्य हो जाएगा। महानिदेशक ने बताया कि कोविड-19 महामारी ने लोगों को सुरक्षित पहुंचाने और जान बचाने में चुनौती को बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि यह बहुत कठिन था। लोगों को गांवों से सुरक्षित शिविरों में ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और वे ऐसी स्थिति में नहीं थे कि इस कठिन समय में सामाजिक दूरी का पालन कर पाएं।’’ 

हालांकि, प्रधान ने कहा कि आश्रय स्थलों को संक्रमण मुक्त बनाने का काम किया गया, लोगों को छोटे-छोटे समूह में बांटा गया और सबको एक-दूसरे से सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने को कहा गया। हमारा पहला लक्ष्य लोगों को खतरे से बचाना फिर महामारी के नियमों का पालन करना था। एनडीआरएफ के एक कर्मी के संक्रमित पाए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह इक्का-दुक्का मामला है और चिंता की बात नहीं है क्योंकि बल में जनवरी से ही इसके लिए कदम उठाए गए हैं। 

Web Title: Improve infrastructure by taking lessons from Cyclone Amphan, focus on tackling disaster: NDRF chief
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