पी चिदंबरम ने कहा, 'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट में नहीं होना चाहिए बदलाव, अगर हुआ तो परिणाम हो सकते हैं घातक'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Published: May 14, 2022 03:13 PM2022-05-14T15:13:21+5:302022-05-14T15:21:45+5:30

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में हो रहे सर्वे पर देश के पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इस विषय में स्पष्ट मत है कि अयोध्या विवाद को छोड़कर देश के अन्य सभी धार्मिक स्थलों पर प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 समान रूप से लागू होता है और इस वजह से जो भी पूजा स्थल जिस भी स्थिति में हैं, उन्हें वैसे ही रहने देना चाहिए।

Giving a warning to the Center, P Chidambaram said, 'Place of Worship Act should not be changed, if it happens, the consequences can be fatal' | पी चिदंबरम ने कहा, 'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट में नहीं होना चाहिए बदलाव, अगर हुआ तो परिणाम हो सकते हैं घातक'

फाइल फोटो

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Highlightsपी चिदंबरम ने कहा कि प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में किसी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में अगर बदलाव किया जाता है तो उससे देश की एकता को धक्का लगेगाराव सरकार ने साल 1991 में समुदायों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए इसे लागू किया था

उदयपुर: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए देश के पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि अगर प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट में किसी तरह के बदलाव का प्रयास किया गया तो वह देश के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

चिदंबरम ने कहा, समुदायों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए और समाज में अमन-चैन की बहाली के लिए साल 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट को लागू किया था।

उन्होंने कहा, "प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को बहुत सोच-विचार के बाद लागू किया गया था और चूंकि उस समय अयोध्या का विवाद अपने चरम पर था इसलिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उसे एकमात्र अपवाद मानते हुए इस एक्ट से बाहर रखा था।

पूर्व गृहमंत्री ने कहा, "कांग्रेस पार्टी का इस विषय में स्पष्ट मत है कि अयोध्या विवाद को छोड़कर देश के अन्य सभी धार्मिक स्थलों पर प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 समान रूप से लागू होता है और इस वजह से जो भी पूजा स्थल जिस भी स्थिति में हैं, उन्हें वैसे ही रहने देना चाहिए और एक्ट की अवहेलना करते हुए किसी भी विवादित पूजा स्थल की स्थिति को बदलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।"

चिदंबरम ने पत्रकारों से बात करते हुए आगे कहा, "अगर प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 में किसी भी तरह का बदलाव किया जाता है तो वह देश की एकता के लिए घातक होगा और इससे एक बड़े संघर्ष का जन्म हो सकता है। यही कारण है कि संघर्ष पर विराम लगाने के लिए साल 1991 में नरसिंह राव सरकार ने प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट को पारित किया था।”

मालूम हो कि वाराणसी की कोर्ट ने पांच महिलाओं के दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए काशी विश्वनाथ स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश जारी किया है। इसके बाद से वाराणसी में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

वहीं इस मामले में मुस्लिम पक्ष ने वाराणसी कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाने और लोअर कोर्ट के सर्वे पर लोर लगाने संबंधी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाने से तो मना कर दिया लेकिन मामले की सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार कर लिया।

ज्ञानवापी मस्जिद का मैनेजमेंट देखने वाली अंजुमन इंताजामिया मस्जिद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वकील अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली की  बेंच को बताया कि वाराणसी स्थल पर किए जा रहे सर्वेक्षण कानूनी नियमों और सुप्रीाम कोर्ट के अयोध्या मामले में दिये फैसले के खिलाफ है। इसलिए कोर्ट को तत्काल मामले में हस्तक्षेप करते हुए वाराणसी के लोअर कोर्ट के आदेश पर रोक लगानी चाहिए।

जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “हम पहले मामले से संबंधित सारे पेपर देखेंगे और उसके बाद ही मामले में कोई आदेश जारी करेंगे लेकिन हम इस मामले को सुनने के लिए तैयार हैं।"  (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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