Forward castes are against the general category reservation: Hukumdev Narayan Yadav | सवर्ण आरक्षण का विरोध ऊंची जातियों के ही अमीर लोग कर रहे हैं: हुकुमदेव नारायण यादव
सवर्ण आरक्षण का विरोध ऊंची जातियों के ही अमीर लोग कर रहे हैं: हुकुमदेव नारायण यादव

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बन चुका है। इस विषय पर पेश हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मंडल आंदोलन से करीब से जुड़े रहे हुकुमदेव नारायण यादव से ‘‘भाषा के पांच सवाल’’ और उनके जवाब :- 

प्रश्न : सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के कदम पर आपकी प्रतिक्रिया ? 

उत्तर : इस कानून के कारण ऊंची जाति के गरीब लोगों में चेतना का जागरण होगा, उनका रिश्ता पिछड़े और दलित गरीबों से जुडे़गा और तभी हिन्दुस्तान में सही मायने में सामाजिक क्रांति के साथ आर्थिक एवं सांस्कृतिक क्रांति भी आयेगी । इस कानून का व्यापक एवं दूरगामी प्रभाव पड़ेगा । यह समाजवादी आंदोलन से जुड़े लोगों का सपना था कि कभी पिछड़ी जाति का ऐसा आदमी सत्ता में आयेगा जो सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों के बच्चों के बारे में सोचेगा...पिछड़े वर्ग से आने वाले नरेन्द्र मोदी ने इन्हीं अरमानों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाया है । 

प्रश्न : विपक्षी दलों ने इस विधेयक का समर्थन तो किया लेकिन इसे भाजपा सरकार का चुनावी लालीपॉप बताया और इससे गरीबों को कोई फायदा नहीं होने की बात कही है। क्यों ? 

उत्तर : लोहिया के दर्शन के अनुसार, गरीब के अंदर दो तरह की भूख है... एक रोटी से जुड़ी पेट की भूख और दूसरा सम्मान से जुड़ी मन की भूख । पिछड़े और दलित दोनों तरह की भूख से पीड़ित हैं जबकि ऊंची जाति के गरीब पेट की भूख से पीड़ित हैं । ऊंची जाति में भी सामंतों का एक वर्ग है जो अपनी ही जाति के गरीबों का शोषण करता है, उन्हें बराबरी पर नहीं आने देता है । जातिगत शोषण से केवल पिछड़े और दलित ही पीड़ित नहीं हैं बल्कि ऊंची जाति के गरीब भी धनवान से उपेक्षित और पीड़ित होते हैं । ऐसे में मोदी सरकार का सामान्य श्रेणी के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण का फैसला ऊंची जाति के गरीबों के साथ पिछड़े एवं दलितों के साथ जुड़ाव का महत्वपूर्ण कारक बनेगा। इससे जातिभेद मिटेगा और वर्ग बनेगा । 

प्रश्न : विपक्ष की जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी करने और इसके आधार पर आबादी के अनुरूप सभी वर्गों को आरक्षण देने की मांग से क्या आप सहमत हैं? 

उत्तर : आरक्षण का मतलब होता है ‘‘विशेष अवसर’’ । आरक्षण का लाभ सबसे पहले उन्हें मिले जिनके पास खेती, नौकरी और व्यापार में से एक भी साधन नहीं है । इसके बाद विशेष अवसर का लाभ उन्हें मिले जिनके पास इनमें से कोई एक साधन हो । सरकारी नौकरी के लिये अंतरजातीय विवाह को अनिवार्य किया जाना चाहिए । इससे ऐसा समाज बनेगा जो वर्गविहीन एवं वर्णविहीन होगा और तब भारतीयता के विराट रूप का बोध होगा । 

प्रश्न : सामान्य श्रेणी को आरक्षण के कदम का एक वर्ग ने विरोध किया है, क्यों ? 

उत्तर : इस विषय पर समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है । मैं स्पष्ट कर दूं कि इस कोटे से पिछड़ा और दलित वर्गों को जो आरक्षण प्राप्त है, उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है । पिछड़ों एवं दलितों को 50 प्रतिशत आरक्षण यथावत है । अगर संसद में चर्चा को देखें तब सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध ज्यादातर सामान्य वर्ग के नेताओं ने किया है । अनुसूचित जाति, ओबीसी वर्ग के नेताओं ने इसका समर्थन ही किया है । अन्नाद्रमुक और द्रमुक का जन्म ही ब्राह्मण विरोध के आधार पर हुआ । 

प्रश्न : क्या सरकार के इस कदम से वर्ग व्यवस्था को बढ़ावा नहीं मिलेगा और समाज में विभाजन नहीं बढ़ेगा ? 

उत्तर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उदारवाद की नई धारा बहाई है जिसका आधार ‘सबका साथ, सबका विकास’ है । उज्जवला योजना में सबसे ज्यादा गैस सिलिंडर दलितों, पिछड़ों अनुसूचित जाति के लोगों, मुस्लिमों को बांटे गये । उसमें कहां विवाद है । सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं वे सभी गरीबोन्मुखी हैं, झोपड़ी वालों, निर्बल एवं निर्धन के लिये हैं । ऐसे में सामान्य श्रेणी के निर्धन एवं निर्बल के सशक्तिकरण के इस कदम का खुले मन से समर्थन किया जाना चाहिए ।


Web Title: Forward castes are against the general category reservation: Hukumdev Narayan Yadav
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