Former Congress MLA serving sentence in 1984 anti-Sikh riot case dies of Covid-19 | 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व विधायक की कोविड-19 से मौत
सिंह भी जेल संख्या 14 में बंद था। महानिदेशक (जेल) संदीप गोयल ने बताया कि यादव ने 26 जून को बेचैनी और ह्रदय से संबंधित कुछ समस्याओं की शिकायत की थी।

Highlightsपूर्व विधायक की कोविड-19 के कारण एक अस्पताल में मौत हो गई।यादव 31 दिसम्बर 2018 से जेल में बंद थे।

नयी दिल्ली: वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में जेल की सजा काट रहे कांग्रेस के एक पूर्व विधायक की कोविड-19 के कारण यहां एक अस्पताल में मौत हो गई। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडोली जेल में संक्रमण से जान गंवाने वाले वह दूसरे कैदी है। अधिकारियों ने बताया कि महेन्द्र यादव (70) पालम विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक थे। वह मंडोली जेल की जेल संख्या 14 में बंद थे, जहां वह 10 साल की सजा काट रहे थे। यादव को 26 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

एक अन्य कैदी कंवर सिंह की पिछले महीने मौत हो गई थी और वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। सिंह भी जेल संख्या 14 में बंद था। महानिदेशक (जेल) संदीप गोयल ने बताया कि यादव ने 26 जून को बेचैनी और ह्रदय से संबंधित कुछ समस्याओं की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि यादव को डीडीयू अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें उसी दिन एलएनजेपी अस्पताल के लिए रेफर किया गया और वहां भर्ती किया गया। इसके बाद उनके परिवार के अनुरोध पर उन्हें 30 जून को पुलिस निगरानी में द्वारका में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें सूचना मिली कि महेंद्र यादव की चार जुलाई की शाम अस्पताल में मौत हो गई है।’’

अधिकारियों ने बताया कि यादव 31 दिसम्बर 2018 से जेल में बंद थे। इस बीच पूर्व विधायक के पुत्र और दिल्ली कांग्रेस के नेता रघुवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों ने उनके पिता की देखभाल ठीक से नहीं की और उन्होंने उनके पिता को अस्पताल में भर्ती कराये जाने के बारे में परिवार को सूचना नहीं दी। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा, ‘‘जेल अधिकारियों द्वारा हमें उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया था। मुझे 28 जून को ही किसी से पता चला कि मेरे पिता को कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद मैंने जेल अधिकारियों से बेहतर इलाज के लिए उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराये जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया।’’

यादव ने कहा कि वह 30 जून को अपने पिता से मिले और उनसे मुश्किल से पांच मिनट बात की जबकि उन्हें द्वारका के एक अस्पताल में भर्ती किया जा रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘वह तब ठीक थे लेकिन दिन-प्रतिदिन उनकी हालत बिगड़ती गई और वह हमसे बात करने की स्थिति में नहीं थे।’’ हालांकि जेल अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी देखभाल अच्छी तरह से की जा रही थी और उन्होंने एलएनजेपी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराये जाने के समय 26 जून की शाम को उनके परिवार को टेलीफोन पर सूचित किया था।

उच्चतम न्यायालय ने एक जुलाई को यादव की अंतरिम जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। यह याचिका इस आधार पर दायर की गई थी कि कोविड-19 से संक्रमित पाये जाने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। यादव और पूर्व विधायक कुषाण खोखर को 2018 में इस मामले में दोषी ठहराया गया था। 

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