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पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने राज्यसभा सदस्यता पर उठते सवालों का दिया जवाब, कहा- ऐसी सोच रखने वाले देश के दुश्मन हैं

By प्रिया कुमारी | Updated: March 22, 2020 11:05 IST

पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई के राज्यसभा में सदस्यता देने को लेकर उन पर कई सवाल उठ रहे थे। कहा जा रहा था कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें जॉब दिया जा रहा है।

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ठळक मुद्देरंजन गोगोइ ने कहा कि मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे परमाणू बंम ही गिर गया हो।ये मेरे लिए देश की सेवा है। न कि मेरे लिए कोई उपहार

पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई के राज्यसभा में सदस्यता देने को लेकर उन पर कई सवाल उठ रहे थे। कहा जा रहा था कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें जॉब दिया जा रहा है। और कई सवाल सोशल मीडिया से लेकर मीडिया के चर्चा में रहे। इसी क्रम में रंजन गोगोई ने टाइम्स नाउ से बातचीत करते हुए उन पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है।  उन्होंने कहा कि मुझे सरकार की तरफ से कोई उपहार नहीं मिला है। बल्कि राष्ट्रपति की अनुशंसा पर देश की सेवा करने का मौका मिला है। और अगर मुझे उपहार ही लेना होतो तो क्या मैं केवल राज्यसभा की सदस्यता से मान जाता?

जब रंजन गोगोई से पूछा गया कि, क्या राज्यसभा की सदस्यता का ऑफर स्वीकार करना सही है? इस बात का जवाब देते हुए रंजन गोगोई ने कहा कि मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे परमाणु बम ही गिर गया हो। संविधान की आर्टिकल 80 के तहत राष्ट्रपति को लगा कि मुझे सदस्यता के साथ सम्मानित करना चाहिए तो उन्होंने किया। और आप इस सम्मान को इंकार कैसे कर सकते हैं। 

गोगोई से पूछा गया कि आपने इस ऑफर से इंकार क्यों नहीं किया? इसके जवाब में रंजन गोगोई ने कहा कि मैं मानता हूं कि इस देश में दो पद बहुत ही प्रतिष्ठित हैं, एक प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायधीश। मैने अपना कार्यकाल पूरा किया। मेरे फैसले वाली बेंच में और भी अन्य जज हुआ करते थे। उन फैसलों पर उनकी सहमती हुआ करती थी। मैने जब आर्टिकल 80 को पढ़ा तो देखा कि देश की सेवा है जिसके जरिए आप अपनी विशेषज्ञता से संसदीय चर्चाओं में गंभीरता दे सकते हैं। 

रंजन गोगोई बेशर्म है इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अगर गोगोई को लॉ कमिशन का असाइनमेंट या एनसीएलएटी जो खाली है, वो दे दी जाती, तब न्यायपालिका का स्तर नहीं गिरता । मेरे फैसले पर सवालिया निशान नहीं लगते..मैं पूछता हूं अगर न्यायधीश को कार्यकाल पूरा करने के बाद राष्ट्र की सेवा करने का मौका मिले तो क्या इसमे हंगामा मचना चाहिए? 365 में 60 दिन ससंद सत्र में शामिल होते है जिसके लिए आपको उतनी ही रकम मिलती है जितनी सीजेआई के रिटायरमेंट के बाद मिलती है। फिर आप क्या कहेंगे कि यह सरकार के मुताबिक दिए गए फैसलों का उपहार है? ऐसा विचार देश के दुश्मन का ही हो सकता है।  

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