यूपी के तमाम जिलों के भूजल में मिला फ्लोराइड, आर्सेनिक, जनता को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना चुनौती

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 9, 2026 18:09 IST2026-01-09T18:09:27+5:302026-01-09T18:09:27+5:30

यूपी के सभी 75 जिलों में शुद्ध पेयजल की स्थिति को लेकर जल जीवन मिशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 63 जिलों के पानी में फ्लोराइड मिला है. जबकि 18 जिले ऐसे हैं जिनमें फ्लोराइड और आर्सेनिक भूजल में मिला पाया गया है.

Fluoride and arsenic have been found in the groundwater of numerous districts in Uttar Pradesh, making it a challenge to provide clean drinking water to the public | यूपी के तमाम जिलों के भूजल में मिला फ्लोराइड, आर्सेनिक, जनता को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना चुनौती

यूपी के तमाम जिलों के भूजल में मिला फ्लोराइड, आर्सेनिक, जनता को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना चुनौती

Highlightsप्रदेश के 75 जिलों में से 63 जिलों के भूजल में फ्लोराइड मिला हैप्रदेश के 18 जिलों के भूजल में फ्लोराइड और आर्सेनिक  पाया गयावैज्ञानिकों का कहना है, जनता को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना चुनौती बना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की जनता को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना योगी सरकार के लिए अब चुनौती बनता जा रहा है. इसकी वजह है, यूपी में भूजल की खराब होती सेहत. यूपी के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, नोएडा,बलिया, प्रयागराज, उन्नाव, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे वीआईपी  शहरों के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड और कई अन्य प्रदूषक मिले हैं. यूपी के सभी 75 जिलों में शुद्ध पेयजल की स्थिति को लेकर जल जीवन मिशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 63 जिलों के पानी में फ्लोराइड मिला है. जबकि 18 जिले ऐसे हैं जिनमें फ्लोराइड और आर्सेनिक भूजल में मिला पाया गया है. फ्लोराइड से प्रभावित जिलों के पानी में फ्लोराइड तीन पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) तक पाया गया, जो मानक से अधिक है. पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) से अधिक होने पर फ्लोरोसिस बीमारी से प्रभावित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है. यही नहीं आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में कई विकास खंड भूजल के अति दोहन के शिकार हो गए हैं.

इसके बाद भी सरकार के स्तर से इस समस्या का कोई स्थायी समाधान खोजा नहीं जा पा रहा है. हालांकि सरकार का दावा है कि भूजल से निर्भरता खत्म करने के लिए प्रभावित जिलों को भविष्य पानी मुहैया कराने के लिए नदियों से पाइप के माध्यम से पानी पहुंचाने की योजना पर कार्य हो रहा है. इसके अलावा सूबे में जिन जिलों के भूजल में फ्लोराइड तथा आर्सेनिक मिला है, उनमें राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण मिशन चल रहा है. जिसके चलते फ्लोरोसिस से प्रभावित लोगों को दवा आदि दी जा रही है. इसके अलावा इन जिलों में लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए जल जीवन मिशन ने पाइप लाइन के जरिए घरों तक पानी पहुंचाने की कई योजनाएं शुरू की हैं. 

कहा जा रहा है भूजल में फ्लोराइड तथा आर्सेनिक जैसे अन्य प्रदूषकों को हटाने के लिए शोधन यंत्र और तकनीक पर अधिक खर्च होता है, इसलिए पाइप लाइन के जरिए इन जिलों में लोगों को पानी मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है. जिन जिलों के भूजल में फ्लोराइड तथा आर्सेनिक मिला है, उनमें लगे हैंडपंप से पानी निकाल कर ना पीने की सलाह लोगों को दी जा रही है. ताकि लोगों प्रदूषित पानी पीकर बीमार ना हो. फिलहाल यूपी के तमाम जिलों के भूजल का स्तर लगातार नीचे जाने और भूजल में फ्लोराइड और आर्सेनिक पाए जाने को वैज्ञानिक गंभीर समस्या बता रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि जनता को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में भूजल का प्र्न्दूषित होना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. इसलिए सरकार इस तरफ ध्यान देना चाहिए.

प्रदूषित पानी पीने से यह होगा नुकसान

भूजल में फ्लोराइड और आर्सेनिक पाया जाना खतरनाक है. जल जीवन मिशन के अधिकारियों के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) से अधिक होने पर फ्लोरोसिस बीमारी होने की आशंका रहती है. मनुष्य के शरीर में कुल फ्लोराइड का 96 प्रतिशत हिस्सा हड्डियों व दांतों में पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा अधिक होने पर असमय ही दांत गिरने लगते है, हड्डियों में टेढ़ापन आने के साथ ही  अन्य विकृतियां हो जाती हैं. जबकि पीने के पानी में आर्सेनिक होने के कारण लोगों को उल्टी और दस्त होने लगते हैं. लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त पानी पीने से त्वचा पर काले धब्बे, घाव, फेफड़े, मूत्राशय, त्वचा कैंसर भी हो सकता है. इसलिए भूजल में फ्लोराइड और आर्सेनिक पाए जाने वाले सूबे के 18 जिलों में लोगों को पानी को गरम कर के पीने की सलाह दी जा रही है और हैंड पंप का पानी ना पीने की सलाह दी जा रही है.

यूपी के इन जिलों के भूजल में मिला फ्लोराइड 

अलीगढ़, आगरा, अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, बागपत, बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, एटा, इटावा, अयोध्या, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, जालौन, जौनपुर, झांसी, ज्योतिबा फुले नगर,  कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कासगंज, कौशांबी, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, उन्नाव, ललितपुर, हाथरस, महाराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुजफ्फर नगर, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संत कबीर नगर, भदोही, शाहजहांपुर, शामली, श्रावस्ती, सीतापुर, सोनभद्र, सुलतानपुर, वाराणसी.

इन जिलों के भूजल में मिला फ्लोराइड और आर्सेनिक 

लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, अलीगढ़, बहराइच, इटावा, गाजीपुर, गोंडा, जौनपुर, झांसी, अमरोहा, लखीमपुर खीरी,  महाराजगंज, मथुरा, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, सहारनपुर, सोनभद्र.

Web Title: Fluoride and arsenic have been found in the groundwater of numerous districts in Uttar Pradesh, making it a challenge to provide clean drinking water to the public

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