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सूचना अधिकार कानून की अवेहलना करने पर पांच अधिकारियों पर जुर्माना

By भाषा | Updated: March 11, 2021 17:00 IST

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जयपुर, 11 मार्च राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के दो अधिकारियों पर सूचना अधिकार कानून की अवेहलना करने पर 15-15 हजार रुपये और स्वायत शासन विभाग के तीन अधिकारियों पर भी जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि उनकी तनख्वाह से वसूला जायेगा।

राज्य सूचना आयुक्त लक्ष्मण सिंह ने सीमावर्ती बाड़मेर जिले में साता पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने बाड़मेर के भगवान सिंह की अपील पर यह जुर्माना लगाया है जिसमें उन्होंने शिकायत की थी कि अधिकारी उन्हें लम्बे समय से सूचना नहीं दे रहे हैं।

आयुक्त ने पाली जिले में कुरना के ग्राम सचिव पर 15 हजार रुपये शास्ति अधिरोपित करने का आदेश दिया है। वहां स्थानीय व्यक्ति ढला राम ने 20 दिसम्बर, 2018 को ग्राम पंचायत से ग्राम पंचायत की बैठक का विवरण और केश बुक का विवरण माँगा था। लेकिन ग्राम सचिव ने उनके आवेदन को अनदेखा कर दिया।

आयोग ने ग्राम सेवक को चार बार नोटिस भेज कर स्प्ष्टीकरण देने को कहा। लेकिन ग्राम सचिव ने इसे भी अनदेखा किया।

इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए राज्य सूचना आयुक्त लक्ष्मण सिंह ने ग्राम सचिव पर पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा ग्राम सेवक ढला राम को रिकॉर्ड का अवलोकन करने के लिए आमंत्रित करे और उन्हें 100 पृष्ठ तक की सूचना निशुल्क उपलब्ध करवाए।

ऐसे ही आयोग ने जोधपुर जिले में भाखरी के ग्राम सेवक पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उधर राज्य सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने कोटा नगर विकास न्यास के सचिव पर सूचना अधिकार कानून की अनदेखी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग में कोटा के कुलदीप कपूर ने न्यास के खिलाफ अपील दायर कर शिकायत की कि उन्हें सूचना मुहैया नहीं करवाई जा रही है। कपूर ने 25 जून, 2019 को अर्जी दाखिल कर सूचना मांगी थी। इस मामले में न्यास ने आयोग से जवाब तलब किया। लेकिन तीन बार अवसर देने के बाद भी न्यास ने कोई जवाब नहीं दिया। आयोग ने आदेश की प्रति कार्मिक विभाग को भी भेजने का निर्देश दिया है।

आयुक्त बारेठ ने भीलवाड़ा में आसींद नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पर दो अलग अलग मामलो में पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग में आसींद के मोहम्मद सलीम ने शिकायत की थी कि दो साल बाद भी उनकी अर्जी पर पालिका ने सूचना मुहैया नहीं करवाई। आयोग ने अधिकारी से इस देरी और कोताही का सबब पूछा। मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। आयोग ने अपने आदेश की प्रति स्थानीय निकाय विभाग को भेजने का निर्देश दिया है।

राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त डी. बी. गुप्ता हर सप्ताह अन्य चार सूचना आयुक्तों के साथ बैठक कर काम काज की समीक्षा कर रहे हैं। इससे आयोग के काम में तेजी आई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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