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जम्मू-कश्मीर: फारूक अब्दुल्ला की बहन और बेटी हिरासत में, आर्टिकल-370 हटाये जाने पर कर रहे थे प्रदर्शन

By विनीत कुमार | Updated: October 15, 2019 13:50 IST

यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाये जाने के खिलाफ था। इस प्रदर्शन के तहत कई कश्मीरी महिलाओं ने श्रीनगर के लाल चौक पर प्रदर्शन के लिए जुटने की कोशिश की थी।

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ठळक मुद्देकश्मीर: उमर अब्दुल्ला की बहन साफिया अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गयाश्रीनगर के लाल चौक पर महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान लिया गया हिरासत में

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बहन और फारूक अब्दुल्ला की बेटी साफिया अब्दुल्ला को श्रीनगर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मंगलवार को हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार साफिया महिलाओं से जुड़ी एक सिविल सोसाइटी के प्रदर्शन में हिस्सा ले रही थीं। फारूक अब्दुल्ला की बहन सुरैया को भी हिरासत में लिया गया है।

यह प्रदर्शन आर्टिकल 370 हटाये जाने के खिलाफ था। माना जा रहा है कि इसी साल 5 अगस्तो को राज्य से आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद बदली हुई परिस्थिति के बीच यह इस तरह का पहला विरोध-प्रदर्शन था। इस प्रदर्शन के तहत कई कश्मीरी महिलाओं ने श्रीनगर के लाल चौक पर प्रदर्शन के लिए जुटने की कोशिश की थी।

पुलिस ने हालांकि इस प्रदर्शन को रोक लिया और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। महिला सीआरपीएफ जवानों ने प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहनों में बैठाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कवरेज के लिए आए मीडिया को बयान वितरित करने से रोकने का प्रयास भी किया। बयान में कहा गया है 'हम कश्मीर की महिलाओं ने भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A को हटाए जाने तथा राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के एकतरफा फैसले को अस्वीकार कर दिया है।' 

नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की बहाली की मांग करते हुए महिलाओं ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से धोखा और अपमान मिला है। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विसैन्यीकरण की भी मांग की। बयान में यह भी कहा गया है, 'हम कश्मीर में झूठे एवं गुमराह करने वाले प्रचार के लिए राष्ट्रीय मीडिया के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं।'

बता दें कि 5 अगस्त के बाद से 1000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसमें जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला जैसे बड़े नेता भी शामिल हैं। 

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और लद्दाख को इससे अलग करने के फैसले के बाद से राज्य में आम जन-जीवन पिछले दो महीनों में खासा प्रभावित हुआ है। बाजार से लेकर स्कूल, कॉलेज, कार्यालय आदि कई दिनों तक बंद रहे। यहां तक कि मोबाइल और लैंडलाइन सेवा भी बंद रहे। अब स्कूल-कॉलेज और कार्यालय आदि खुलने लगे हैं लेकिन सभी जगहों पर लोगों की मौजदगी अब भी बेहद कम है। हालांकि, राज्य में प्रशासन लगातार कह रहा है कि वह सामान्य परिस्थिति की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है। 

पिछले ही दिन यानी सोमवार को राज्य में पोस्टपेड मोबाइल सेवा भी शुरू कर दी गई। हालांकि, मोबाइल इंटरनेट सेवा अब भी बंद है। लैंडलाइन भी राज्य के लगभग सभी हिस्सो में शुरू हो चुका है। राज्य में ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) चुनाव की भी घोषणा हो चुकी है। यह चुनाव 24 अक्टूबर को होंगे। वैसे, राज्य की कई बड़ी पार्टियों मसलन कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेस और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

(भाषा इनपुट के साथ)

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