Coronavirus lockdown maharashtra Sangli kismis Corona hit farmers turnover 300 crores | किसानों पर कोरोना की मार, सांगली के किशमिश का विदेशों में निर्यात न होने से 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित
उत्पादन का खर्च भी न निकल पाने की आशंका ने बढ़ाई किसानों की चिंता. (file photo)

Highlightsकिशमिश के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध राज्य के पश्चिमी अंचल के सांगली जिले के किसानों पर कोरोना की मार.गए वर्ष के मुकाबले इस बार यहां जताई जा रही है किशमिश के दुगने उत्पादन की संभावना, लेकिन अब 25 हजार टन से ज्यादा का माल रुका.

सांगलीः इस बार पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली जिले में किशमिश उत्पादक किसान विचित्र स्थिति का सामना कर रहे हैं. करीब डेढ़ महीने पहले सांगली जिले में किशमिश उत्पादक किसान किशमिश की बंपर पैदावार के चलते खासे उत्साहित थे.

लेकिन, कोरोना संक्रमण के कारण पिछले कई दिनों से जारी लॉकडाउन ने उनकी नींद उड़ा दी है. इस कारण यहां के किशमिश का विदेशों में निर्यात रुक गया है. लिहाजा, इन किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. बता दें कि बड़ी मात्रा में गुणवत्तापूर्ण किशमिश के उत्पादन और निर्यात के लिहाज से सांगली जिला देश-विदेश में जाना जाता है. सांगली का किशमिश ईरान, इराक, बंगलादेश और श्रीलंका जैसे देशों में बड़ी मात्रा और ऊंचे दाम पर निर्यात होता है.

सांगली तासगांव किशमिश मर्चेंट्स एसोसिएशन का अनुमान है कि कोरोना संकट के कारण यहां करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है. वहीं, 25 हजार टन से ज्यादा किसमिश का निर्यात नहीं हो पा रहा है. यहां से सबसे ज्यादा किशमिश विदेशों में निर्यात होता है. इसलिए, अब यहां के किसानों के सामने यह प्रश्न है कि इस बार किशमिश उत्पादन में हुई वृद्धि की तुलना में क्या उन्हें उत्पादन लागत पर किया गया खर्च भी नसीब हो सकेगा.

तासगांव में किशमिश उत्पादक किसान अथर्व माने कोरोना वैश्विक महामारी प्रकोप के बारे में अधिक से अधिक जानकारी पाने के लिए इन दिनों घर पर टेलीविजन का सहारा ले रहे हैं. पर, मौजूदा संकट का कोई स्थायी समाधान न समझ में आने के कारण वे खासे परेशान हैं. उन्हें लगता है कि जिन देशों में उनका माल जाता है, वहां भी कोरोना का संकट जल्द टलने वाला नहीं है. ऐसी स्थिति में उनका कहना है कि बड़ी मात्रा में उनका पूरा माल निर्यात नहीं हो सकेगा और उसका उचित दाम मिलना तो मुमकिन भी नहीं है.

अथर्व माने किशमिश उत्पादन से जुड़ी मौजूदा समस्या के बारे में बताते हैं, "सांगली जिले सहित राज्य में इस बार करीब दस हजार एकड़ पर अंगूर की खेती की गई थी. इस लिहाज से पिछले साल की अपेक्षा अंगूर का उत्पादन क्षेत्र में कोई 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इससे किशमिश की पैदावार बढ़नी ही थी. लेकिन, कोरोना संकट के कारण 18 मार्च से किशमिश का कारोबार ठप्प हो गया है.

क्योंकि, राज्य सरकार ने कोरोना से बचने के लिए पहले ही पुणे और मुंबई में लॉकडाउन लगा दिया था. इसकी वजह से यातायात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी. फिर, इसके करीब एक हफ्ते बाद प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी. इसके बाद जिला स्तर पर प्रशासन द्वारा कोल्हापुर, सोलापुर और सतारा जिलों की सीमाएं सील कर दी गई हैं.

इस तरह, आप कह सकते हैं कि यातायात पूरी तरह से ठप्प होने के कारण कोई एक महीने से स्थानीय बाजारों तक में किशमिश के नए माल की बिक्री रुकी हुई है." यही वजह है कि अथर्व माने की तरह इस अंचल के अन्य सभी किशमिश उत्पादक किसानों को यह चिंता सता रही है कि जिस अनुपात में उत्पादन बढ़ा है क्या उसी अनुपात में उनके द्वारा उत्पादन पर खर्च लागत मूल्य भी निकलेगा या नहीं.

महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष राज्य में एक लाख 80 हजार टन किशमिश का उत्पादन हुआ था. वहीं, इस कारोबार से जुड़े कुछ जानकारों का कहना है कि अंगूर की खेती का क्षेत्र 40 प्रतिशत तक बढ़ने के कारण किशमिश उत्पादन बढ़ने की संभावना है. उनका मानना है कि इस वर्ष किशमिश का उत्पादन दो लाख टन से अधिक हो सकता है. लेकिन, कोरोना के कारण लॉकडाउन की स्थिति में विदेशों में निर्यात रुक जाने से उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा.

सांगली तासगाव किशमिश मर्चेंट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय बोथरा बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण किशमिश के सौदे बंद होने से पूरे राज्य में करीब 25 हजार टन माल बेकार पड़ा है. सिर्फ तासगाव बाजार में ही करीब 900 टन माल पर कोई सौदा नहीं हो पा रहा है.

संजय बोथरा कहते हैं, "स्थानीय बाजार में इस समय किशमिश की कीमत 160 से 200 रूपए किलो है. पर, किशमिश उत्पादन बढ़ने के बावजूद इसका भाव गिरने की आशंका से बाजार में डर का माहौल है. अब किशमिश की कीमत वर्तमान भाव से जैसे-जैसे गिरेगी वैसे-वैसे उत्पादकों को अपनी लागत निकालनी मुश्किल पड़ती जाएगी."

दूसरी तरफ, इससे अंगूर की खेती करने वाले किसान भी प्रभावित होंगे. मालगाव में अमोल जाधव अपने सवा दो एकड़ के खेत में अंगूर की खेती करते हैं. उनका कहना है, "अगले वर्ष न सिर्फ सांगली जिले बल्कि पूरे राज्य में अंगूर उगाने वाले किसानों पर बाजारों में यह दबाव रहेगा कि वे अपनी फसल का दाम कम करें. पिछले साल का माल तो बाजार में जमा है ही, इस साल उत्पादन बढ़ने के कारण अब नजदीकी जिलों के बाजारों में तक यह नहीं पहुंच पा रहा है. यही समय होता है जब पुराना किशमिश बाजार से जाता है और नया किशमिश बाजार में आता है. ऐसे में सांगली में ही जरूरत से ज्यादा माल स्टॉक हो गया है. इससे मंदी रहेगी. इसलिए, थोक बाजार में अंगूर के दाम नीचे गिर सकते हैं."

किशमिश विक्रेता बताते हैं कि आमतौर पर अच्छी किस्म की किशमिश पर अच्छी कीमत मिलती है. पर, इस वर्ष की परिस्थिति निर्यात के लिए प्रतिकूल हैं. लिहाजा, किशमिश उत्पादकों को अच्छी किस्म की किशमिश पर भी कोई मुनाफा मिलने की उम्मीद नहीं है.

हालांकि, पश्चिमी महाराष्ट्र के किशमिश उत्पादक किसान पहले भी कई दूसरी समस्याओं का सामना करते रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख है कि कई बार बेमौसम बरसात के चलते अंगूर की फसल पर बुरा असर पड़ता है और उसका उत्पादन घट जाता है. इसी वजह से अंगूर का वजन घटने से भी किशमिश के उत्पादन में कमी आती है. पर, वर्तमान संकट इन किसानों के लिए नया तो है ही, दीर्घकालिक भी है.

 

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