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कोरोना काल में अगले दो महीने ज्यादा संभलें: मास्क पहनें, च्यवनप्राश खाएं और हल्दी वाला दूध पीएं

By एसके गुप्ता | Updated: September 22, 2020 20:23 IST

वह खुद भी मास्क पहनें और लोगों को भी मास्क पहनने के लिए प्रेरित करें। अगले माह से त्योहार शुरू हो रहे हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन जरूरी करें वरना जरा सी चूक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।

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ठळक मुद्देदेखने में आ रहा है कि लोग मास्क का इस्तेमाल कम कर रहे हैं। जिससे संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।हल्दी वाला दूध और च्यवनप्राश के सेवन से आप सर्दी के दिनों में होने वाले संक्रमण से भी बच सकेंगे।परेशानी की बात यह है कि कोरोना और सर्दी के मौसम में होने वाला बुखार और जुकाम एक जैसे ही लक्षण को दर्शाते हैं।

नई दिल्लीः कोरोना काल में अगले दो माह ज्यादा सतर्कता वाले हैं। देखने में आ रहा है कि लोग मास्क का इस्तेमाल कम कर रहे हैं। जिससे संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

मेरी देशवासियों से अपील है कि वह खुद भी मास्क पहनें और लोगों को भी मास्क पहनने के लिए प्रेरित करें। अगले माह से त्योहार शुरू हो रहे हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन जरूरी करें वरना जरा सी चूक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।

नीति आयोग के सदस्य और कोरोना राष्ट्रीय टास्क फोर्स के चेयरमैन डा. वीके पॉल ने यह बातें मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेसवार्ता में कही। डा. पॉल ने कहा कि इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी है कि लोग हल्दी वाला दूध पीएं, च्यवनप्राश खाएं और काढ़ा जरूर पीएं। जिससे कोरोना संक्रमित होने से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव आने वाला है और सर्दी के दिनों में जुकाम व खांसी होना आम बात है। ऐसे में इससे बचने का तरीका मुंह पर मास्क और काढ़ा पीना है। हल्दी वाला दूध और च्यवनप्राश के सेवन से आप सर्दी के दिनों में होने वाले संक्रमण से भी बच सकेंगे। परेशानी की बात यह है कि कोरोना और सर्दी के मौसम में होने वाला बुखार और जुकाम एक जैसे ही लक्षण को दर्शाते हैं। ऐसे में कुछ तरीकों को अपनाकर इससे बचा जा सकता है।

मेडिकल पीजी छात्रों के लिए जिला अस्पतालों में तीन महीने की पोस्टिंग जरूरी

नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पॉल ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में ‘एमडी' या ‘एमएस' की पढ़ाई करने वाले सभी परास्नातक (पीजी) छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 में पाठ्यक्रम के हिस्से के तौर पर जिला अस्पतालों में तीन महीने अनिवार्य रूप से सेवा देनी होगी। तीन महीने का यह ‘रोटेशन' परास्नातक तीसरे, चौथे या पांचवें सेमेस्टर में होगा। 

भारतीय चिकित्सा परिषद की जिम्मेदारियों को संभाल रहे संचालन मंडल ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर दी है। इस रोटेशन को ‘डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम' कहा जाएगा और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पीजी चिकित्सा छात्र को ‘डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंट' कहा जाएगा। इससे मेडिकल पीजी के छात्र जिला स्वास्थ्य प्रणाली से रूबरू होंगे। साथ ही देश के जिला स्तर अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं भी सुधरेंगी। 

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