लाइव न्यूज़ :

कोवैक्सीन कोरोना वायरस के बीटा और डेल्टा वैरिएंट पर भी प्रभावी, शुरुआती शोध में दावा

By दीप्ती कुमारी | Updated: June 9, 2021 11:56 IST

भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन को लेकर एक शोध में कहा गया है कि ये कोविड-19 वायरस के बीटा और डेल्टा जैसे वैरिएंट से भी सुरक्षा प्रदान करता है। शोध के शुरुआती नतीजों में ये बात कही गई है।

Open in App
ठळक मुद्देशोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि कोवैक्सीन भारत के डेल्टा और बीटा वैरिएंट पर असरदार है ये अध्ययन अभी हालांकि कहीं छपा नहीं है और न ही इसकी समीक्षा हुई है भारत में दूसरी लहर के लिए डेल्टा वैरिएंट को हाल में एक शोध के बाद जिम्मेदार बताया गया था

दिल्ली : पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत बायोटेक के शोधकर्ताओं ने एक संयुक्त अध्ययन में पाया कि भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सीन कोरोना वायरस के वैरिएंट बीटा और डेल्टा से सुरक्षा प्रदान करती है । 

कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट सबसे पहले भारत में मिला था। वहीं बीटा वैरीएंट पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। 

हालांकि यह अध्ययन अभी पब्लिश नहीं है और अन्य विशेषज्ञों ने समीक्षा नहीं की है। इस अध्ययन में कोरोना से ठीक हुए 20 लोगों के नमूने लिए गए थे और कोवैक्सीन की दोनों डोज लेने के 28 दिनों बाद 17 अन्य लोगों के सैंपल लिए गए थे ।

अध्ययन में दावा किया गया है कि कोवैक्सीन ने कोरोनावायरस के इन दोनों वैरीएंट के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया । आईसीएमआर प्रमुख बलराम भार्गव इस रिपोर्ट के लेखकों में से एक हैं । साथ ही वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक के सदस्यों में भी शामिल है।

भारत में दूसरी लहर के लिए डेल्टा वैरिएंट जिम्मेदार

हाल में एक सरकारी अध्ययन में कहा गया था कि भारत में दूसरी लहर के लिए अत्याधिक संक्रामक और तेजी से फैलने वाले डेल्टा वेरिएंट जिम्मेदार है । शोध से पता चला है कि यह यूके में पाए गए अल्फा वैरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक है और 50 प्रतिशत से अधिक संक्रामक है । हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक मौतों या मामलों अधिक गंभीरता में डेल्टा वेरिएंट की भूमिका का अभी तक कोई सबूत नहीं है। 

इसके अलावा इस सप्ताह की शुरुआत में एक अन्य प्री-प्रिंट अध्ययन , जिसकी विशेषज्ञ समीक्षा बाकी है , ने कथित तौर पर कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड की तुलना में  कोवैक्सीन ने अधिक एंटीबॉडी का उत्पादन किया है । यह अध्ययन कोरोना वायरस वैक्सीन प्रेरित एंटीबॉडी ट्रीटेड (COVAT) द्वारा किया गया था, जिसमें ऐसे स्वास्थ्यकर्ताओं को शामिल किया गया था, जिन्होंने भारत में प्रशासित होने वाले दो टीकों में से किसी एक की दोनों खुराक ली हो । 

टॅग्स :कोविड-19 इंडियाकोरोना वायरसकोवाक्सिनकोविशील्‍ड
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्यLMOTY 2026: हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण?, डॉ. गौतम भंसाली को 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार

स्वास्थ्यCOVID-19 infection: रक्त वाहिकाओं 5 साल तक बूढ़ी हो सकती हैं?, रिसर्च में खुलासा, 16 देशों के 2400 लोगों पर अध्ययन

भारत'बादल बम' के बाद अब 'वाटर बम': लेह में बादल फटने से लेकर कोविड वायरस तक चीन पर शंका, अब ब्रह्मपुत्र पर बांध क्या नया हथियार?

स्वास्थ्यसीएम सिद्धरमैया बोले-हृदयाघात से मौतें कोविड टीकाकरण, कर्नाटक विशेषज्ञ पैनल ने कहा-कोई संबंध नहीं, बकवास बात

भारत अधिक खबरें

भारतNagpur: पवनी सफारी में दिखा दुर्लभ ‘काला चीतल’, पर्यटकों में बढ़ा रोमांच

भारत‘अपने स्तर को नीचे न गिराएं’: मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘गुजरात के लोग अनपढ़ हैं’ वाले बयान पर शशि थरूर की सलाह

भारत'इस बार पाकिस्तान के कितने टुकड़े होंगे ये तो सिर्फ ऊपरवाला जानता है', राजनाथ सिंह ने PAK के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ की धमकी का दिया करारा जवाब

भारत403 करोड़ रुपए खर्च?, योगी सरकार का सियासी दांव, बीआर अंबेडकर की मूर्ति पर लगेगा छत्र

भारतमहाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा टेस्ट अनिवार्य रूप से किया शुरू