लाइव न्यूज़ :

Corona Updates: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 50,129 मामले आए सामने, 578 मरीजों की हुई मौत

By रामदीप मिश्रा | Updated: October 25, 2020 09:54 IST

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में 24 अक्टूबर तक कुल 10,25,23,469 नमूनों की जांच की गई, इनमें से 11,40,905 नमूनों की जांच शनिवार को की गई।

Open in App
ठळक मुद्दे भारत में कोरोना के मरीज 78 लाख से पार हो गए हैं। देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 50,129 नए मामले सामने आए।

नई दिल्लीः कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि सक्रिय मरीजों की संख्या तेजी से कम हो रही है। इस घातक वायरस की वजह से पूरी दुनिया प्रभावित है। इस बीच भारत में कोरोना के मरीज 78 लाख से पार हो गए हैं। देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 50,129 नए मामले सामने आए। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई है। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 578 मरीजों की मौत हुई है। अबतक 78,64,811 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमे से 6,68,154 सक्रिय मामले हैं और 70,78,123 लाख ठीक हो गए हैं, जिन्हें अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। वहीं,  62,077 मरीजों की मौत हो चुकी है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में 24 अक्टूबर तक कुल 10,25,23,469 नमूनों की जांच की गई, इनमें से 11,40,905 नमूनों की जांच शनिवार को की गई। भारत उन कुछ देशों में है जहां रोजाना बड़ी संख्या में जांच की जा रही है। देश में प्रयोगशालाओं के बेहतर नेटवर्क और इस तरह की अन्य सुविधाओं से इसमें पर्याप्त सहायता मिली है।

कोरोना वायरस महामारी से अपने परिवार की वित्तीय स्थिति प्रभावित होने को लेकर बीते कुछ महीनों में लगभग 31 प्रतिशत किशोरों ने भारी तनाव का सामना किया। झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा के 7,300 से अधिक किशोरों पर किये गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। गैर सरकारी संगठन ''सेंटर फॉर कैटेलाइजिंग चेंज'' द्वारा अप्रैल, जुलाई और अगस्त में दो चरणों में किये गए इस सर्वेक्षण का शीर्षक ''किशोरों का क्या कहना है? कोविड-19 और इसके प्रभाव'' था। 

सर्वेक्षण में कहा गया है 7,324 किशोरों में से 31 प्रतिशत ने स्वीकार किया है कि वे अपने परिवार की वित्तीय स्थिति पर महामारी के प्रभाव को लेकर भारी तनाव का सामना कर रहे हैं। सर्वे में यह भी पता चला है कि इन महीनों के दौरान महामारी के चलते किशोरियों को भारी लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। 

सर्वेक्षण के अनुसार, ''जिन किशोरियों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें केवल 12 प्रतिशत के पास ही ऑनलाइन कक्षाओं के लिये खुद का मोबाइल फोन था जबकि उनके मुकाबले ऐसे किशोरों की संख्या 35 प्रतिशत थी।'' सर्वेक्षण में कहा गया है, ''इसके अलावा, सर्वेक्षण में शामिल 51 प्रतिशत किशोरियों के पास जरूरी पुस्तकों का अभाव था। इससे पता चलता है कि महामारी ने किस तरह लड़कियों की शिक्षा को प्रभावित किया।’’ 

टॅग्स :कोरोना वायरसकोविड-19 इंडियाकोरोना वायरस इंडिया
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्यLMOTY 2026: हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण?, डॉ. गौतम भंसाली को 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार

स्वास्थ्यCOVID-19 infection: रक्त वाहिकाओं 5 साल तक बूढ़ी हो सकती हैं?, रिसर्च में खुलासा, 16 देशों के 2400 लोगों पर अध्ययन

भारत'बादल बम' के बाद अब 'वाटर बम': लेह में बादल फटने से लेकर कोविड वायरस तक चीन पर शंका, अब ब्रह्मपुत्र पर बांध क्या नया हथियार?

स्वास्थ्यसीएम सिद्धरमैया बोले-हृदयाघात से मौतें कोविड टीकाकरण, कर्नाटक विशेषज्ञ पैनल ने कहा-कोई संबंध नहीं, बकवास बात

भारत अधिक खबरें

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया

भारतबिहार में CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर महिलाओं ने शुरू किया सत्याग्रह

भारतयूपी में स्थापना दिवस के जरिए लोगों के घर-घर पहुंचेगी भाजपा, लोगों को PM मोदी और योगी सरकार की उपलब्धियां बताएँगे पार्टी पदाधिकारी

भारतWATCH: बिहार के सारण जिले में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष का एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो वायरल, दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे खेत में एक लड़की नेता के पीछे भाग रही है