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चिटफंड मामलाः टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी और राजीव कुमार सीबीआई कार्यालय पहुंचे

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 16, 2019 17:26 IST

टीएमसी के महासचिव एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले चटर्जी ने इस संबंध में मीडिया की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए। चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री हैं एवं विधायी मामलों का कार्यभार भी उन्हीं के पास है।

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ठळक मुद्देसंयोग से चटर्जी इस समाचारपत्र के संपादक हैं और ओब्रायन इसके प्रकाशक हैं।सीबीआई सूत्रों ने बताया कि कुमार से पूर्व में सीबीआई अधिकारियों ने शारदा पोन्जी घोटाले के संबंध में पूछताछ की गई थी।

शारदा चिट फंड और रोज वैली मामलों के संबंध में सीबीआई की तरफ से तलब किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी और कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार शुक्रवार को यहां सीबीआई के कार्यालय पहुंचे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि चटर्जी और कुमार दोनों दोपहर में एजेंसी के साल्ट लेक स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचे। सीबीआई ने दो अलग-अलग मामलों में शुक्रवार को दोनों को तलब किया था। अधिकारी ने बताया, “हां, चटर्जी और कुमार दोनों सीबीआई के कार्यालय पहुंचे और संबंधित मामलों के जांच अधिकारी उनसे बात करेंगे।”

टीएमसी के महासचिव एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले चटर्जी ने इस संबंध में मीडिया की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए। चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री हैं एवं विधायी मामलों का कार्यभार भी उन्हीं के पास है।

एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि टीएमसी राज्य सभा सांसद एवं पार्टी के प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन से शारदा घोटाले की जांच के संबंध में नौ अगस्त को सीबीआई की पूछताछ के दौरान चटर्जी का नाम सामने आया। सूत्र ने कहा, ‘‘चटर्जी का नाम पिछले हफ्ते ओब्रायन से पूछताछ के दौरान सामने आया। हमें उनके नाम का पता पार्टी के समाचारपत्र, ‘जागो बांगला’ की कथित फंडिंग के संबंध में पता चला।”

संयोग से चटर्जी इस समाचारपत्र के संपादक हैं और ओब्रायन इसके प्रकाशक हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि कुमार से पूर्व में सीबीआई अधिकारियों ने शारदा पोन्जी घोटाले के संबंध में पूछताछ की गई थी। कई करोड़ रूपये के रोज वैली घोटाले में उनकी भूमिका का पता लगाने के संबंध में उन्हें एजेंसी के अधिकारियों के समक्ष पेश होने को कहा गया।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुमान के मुताबिक रोज वैली घोटाला शारदा पोन्जी घोटाले से कम से कम पांच गुणा ज्यादा बड़ा है। 

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