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कोविड-19 संबंधी विवादित बयान को लेकर भोपाल में कमलनाथ के खिलाफ मामला दर्ज

By भाषा | Updated: May 23, 2021 22:43 IST

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भोपाल, 23 मई मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा उज्जैन में शनिवार को दिए गये कोविड-19 संबंधी कथित विवादित बयान को लेकर रविवार शाम यहां अपराध शाखा थाने में मामला दर्ज किया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भाजपा के भोपाल जिला अध्यक्ष सुमीत पचौरी और भोपाल के दो विधायकों विश्वास सारंग एवं रामेश्वर शर्मा सहित अन्य पार्टी नेताओं की शिकायत पर कमलनाथ के खिलाफ भादंसं की धारा 188 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 के तहत यह प्राथमिकी दर्ज की गई है।

कमलनाथ मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं।

जब अधिकारी से सवाल किया गया कि कमलनाथ पर किस आधार पर मामला दर्ज किया गया है, तो पुलिस अधीक्षक (भोपाल मुख्यालय) रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि यह प्राथमिकी भाजपा द्वारा की शिकायत के साथ पेन ड्राइव में दी गई दो वीडियो के आधार पर दर्ज की गई है। हालांकि, उन्होंने इस पर विस्तृत ब्योरा देने से इनकार कर दिया।

मध्य प्रदेश भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल के पुलिस अधीक्षक को आज सौंपे गए शिकायती ज्ञापन में कहा, ‘‘कमलनाथ ने शनिवार 22 मई को उज्जैन में अपने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि दुनिया में जो कोरोना फैला हुआ है, अब उसे ‘इंडियन वैरियेंट’ कोरोना के नाम से जाना जा रहा है। कमलनाथ ने यह भी कहा था कि कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कोरोना को इंडियन वैरियेंट के नाम से पुकार रहे हैं। कोरोना महामारी के ऐसे संकटपूर्ण समय में कमलनाथ यह बोलकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं और देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर रहे हैं।’’

भाजपा नेताओं ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा है कि कमलनाथ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन किया है। कमलनाथ का यह कृत्य भारतीय दंड विधान के अनुसार राजद्रोह की श्रेणी में आता है।

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा है, ‘‘कमलनाथ ने झूठा आरोप लगाया कि सरकार लाखों लोगों की मौत का आंकड़ा छिपा रही है। उनका यह बयान जनता में भय उत्पन्न करने वाला है जो कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।’’

एक अन्य शिकायत में प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हित में उर्वरक डीएपी की कीमत कम करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। लेकिन देश के लोगों एवं किसानों तक यह संदेश न पहुंचे, इस उद्देश्य से कमलनाथ द्वारा अपने विधायकों के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग में ‘आग लगाने’ की बात कहकर कानून और शांति व्यवस्था को भंग करने का भी दुष्कृत्य किया है।

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक को कमलनाथ के उज्जैन की प्रेस-कांफ्रेंस एवं भोपाल की वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन के वीडियो की पेन ड्राइव सौंपते हुए कमलनाथ के विरूद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 124-ए, 124-2 धारा 1537ए, धारा-188, सायबर अपराध की धारा 65-बी के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की थी।

मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को भी भोपाल में वर्चुअल माध्यम से किये गये संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि विश्व में भारतीय कोरोना का पर्याय बन गया है और ‘मेरा भारत महान छोडिए, मेरा भारत कोविड का बन गया’। इसलिए अब विदेशी लोग भारतीयों से डर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा था कि कोविड-19 के मौतों के बनावटी आंकड़ों को पेश कर भारत पूरे विश्व को धोखा दे रहा है और दावा किया था कि मध्य प्रदेश में इस साल मार्च-अप्रैल में कोविड-19 से 1,02,002 लोगों की मौत हुई है।

इसी बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा, ‘‘भाजपा की झूठी व तथ्यहीन शिकायत पर कमलनाथ के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर भाजपा प्रदेश में गलत परंपराओं को जन्म दे रही है। जनहित की बात कह रहे विपक्ष की आवाज को यह दबाने व कुचलने का प्रयास है। यह भाजपा सरकार की तानाशाही व हिटलरशाही है।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। वह और ताकत से जनता के हक की लड़ाई को लड़ेगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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