पटना:बिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर जारी सियासी गहमागहमी के बीच कैबिनेट की बैठक 14 अप्रैल को बुलाई गई है। यह बैठक सुबह 11 बजे मुख्य सचिवालय में आयोजित होगी। मंत्रिमंडल सचिवालय ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दिया है। नीतीश सरकार की यह आखिरी बैठक मानी जा रही है। यह बैठक मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक मानी जा रही है। बैठक के दौरान नीतीश कुमार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कामों की समीक्षा करेंगे और मंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों से औपचारिक रूप से विदाई भी ले सकते हैं। बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा देंगे। नई सरकार के गठन से पहले यह बैठक राजनीतिक रूप से भी काफी अहम मानी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। इसके बाद वे कैबिनेट की बैठक में शामिल होंगे।
सूत्रों की मानें तो इस अहम बैठक के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस संभावित बदलाव के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी? उधर, जदयू और भाजपा में बैठकों का दौर लगातार जारी है। रविवार को मुख्यमंत्री आवास में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी और जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मंत्री विजय चौधरी ने मीडिया से बातचीत की।
इस दौरान मुलाकात को लेकर विजय चौधरी ने कहा कि सम्राट चौधरी पहले भी मुख्यमंत्री आवास आते थे। नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। स्वाभाविक है आपस में बातचीत होगी। अभी मंत्रिमंडल को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। चंद दिनों का इंतजार है रुक जाइए। उन्होंने कहा कि जब सरकार गठन की घड़ी नजदीक हो, तो ऐसी बैठकों का महत्व बढ़ जाता है। नई सरकार में मंत्रिमंडल को लेकर पूछे गए सवाल पर विजय चौधरी ने साफ कहा कि अभी मंत्रिमंडल को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि कुछ चंद दिनों का इंतजार कीजिए सब कुछ जल्द साफ हो जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे पर भी उन्होंने यही कहा कि जल्द सबको पता चल जाएगा कि आगे क्या होने वाला है। विजय चौधरी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि यह भाजपा को तय करना है। उनकी अनुशंसा पर एनडीए के विधायक दल में नेता चुना जाएगा। मुख्यमंत्री वही चुना जाएगा जो एनडीए की विधायक दल में नेता चुना जाएगा। भाजपा की उसमें अहम भूमिका है। भाजपा अनुशंसा करेगी तब नाम पर मोहर लगाई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार पिछले दो दिनों से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं के संपर्क में हैं। सबसे रायशुमारी की जा रही है। विनोद तावड़े ने शुक्रवार को दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा से मुलाकात की थी। उसके बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई प्रमुख नेताओं से राय ली गई है।
इसके बाद शनिवार की रात अमित शाह के साथ बैठक हुई, जिसमें हर पहलू पर चर्चा हुई। भाजपा की रणनीति पर नजर डालें तो पार्टी अक्सर आखिरी वक्त में चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है। ऐसे में यह भी संभव है कि जो नाम अभी चर्चा में नहीं है, वही अंत में मुख्यमंत्री बन जाए। यही वजह है कि दिल्ली से आने वाली ‘सीक्रेट पर्ची’ पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जो बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगी।
उल्लेखनीय है कि बिहार में मुख्यमंत्री के चेहरे पर ही सियासी पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू की ओर से निशांत कुमार के नाम की चर्चा हो रही है। पटना में निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जदयू लगातार कर रही है। साथ ही पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं। रविवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर पोस्टर लगाया गया।
इसमें लिखा,’बिहार में ना तो बुलडोजर बवाल और ना ही फिर से ‘दंगा-फसाद’ चाहिए। अब आपकी परछाई स्वरूप, युवा जनसेवक निशांते कुमार चाहिए।’ इस तरह से अब एनडीए क्या फैसला लेती है, इसका इंतजार किया जा रहा है। इस बीच दिल्ली में भाजपा बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर मंथन कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि क्या भाजपा अगले मुख्यमंत्री का नाम तय कर चुकी है।