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नगर निकाय चुनाव के बहाने सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांगा इस्तीफा

By एस पी सिन्हा | Updated: October 9, 2022 18:59 IST

मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री को हजारों अति पिछड़ों को आरक्षण से वंचित करने की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1978 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार में 26 फीसदी नौकरियों में आरक्षण मिला। 2003 में राबड़ी देवी ने न ईबीसी को आरक्षण दिया और न ही दलितों को।

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ठळक मुद्देनगर निकाय चुनाव स्थगित होने के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया कहा- नीतीश कुमार, राजद, कांग्रेस ने 23 साल तक निकाय चुनाव नहीं करवायाबीजेपी नेता ने कहा- सीएम को हजारों अति पिछड़ों को आरक्षण से वंचित करने की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए

पटना:बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री व सांसद सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने नगर निकाय चुनाव स्थगित होने के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार, राजद, कांग्रेस ने 23 साल तक निकाय चुनाव नहीं करवाया। भाजपा जब सरकार में आई तब निकाय चुनाव हुआ। भाजपा की वजह से ही आरक्षण मिला। 

मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री को हजारों अति पिछड़ों को आरक्षण से वंचित करने की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1978 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार में 26 फीसदी नौकरियों में आरक्षण मिला। 2003 में राबड़ी देवी ने न ईबीसी को आरक्षण दिया और न ही दलितों को। मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जब से लालू प्रसाद से मिले हैं तब से उन्हें अति पिछड़ों पर भरोसा नहीं रहा। इसी वजह से नगर निकाय चुनाव में यह स्थिति उत्पन्न हुई है। 

उन्होंने मांग की कि बिहार में अति पिछड़ों को आरक्षण देते हुए तत्काल नगर निकाय का चुनाव कराया जाए। मोदी ने महाधिवक्ता, राज्य निर्वाचन आयोग पत्र के हवाले से नीतीश कुमार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की अहम की वजह से आज नगर निकाय चुनाव बाधित हुआ है। नीतीश कुमार ने अति पिछड़ों को अपमानित करने का काम किया है। चुनाव में अब तक के खर्च की भरपाई सरकार करे। नीतीश सरकार राजकोष से खर्च की भरपाई करे। 

मोदी मांग किया कि नीतीश कुमार को जहां भी जाना है, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या यूनाइटेड नेशन ही क्यों न जाना पड़े जाएं, लेकिन तुरंत चुनाव कराएं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश में इस आधार पर स्थानीय चुनाव पर न्यायालय ने रोक लगाया था। इसके बाद भी नीतीश कुमार के दबाव में एजी को अपनी राय बदलनी पड़ी। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग अपने पत्र पर अडिग रहा। सुशील मोदी ने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार के प्रेशर की वजह से ही एजी ने तीसरी दफे अपनी राय बदली। 

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