पटनाः बिहार विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को सदन में राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली से जुड़े सवाल विपक्ष के साथ साथ सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों ने विभागीय मंत्री मंगल पांडेय को घेर लिया। सहरसा से इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के विधायक आईपी गुप्ता ने ऐसा सवाल पूछ लिया जिसका जवाब खुद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को देना पड़ गया। दरअसल, आईपी गुप्ता ने सरकार से सहरसा में मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़ा सवाल पूछा था, सरकार की तरफ से जवाब तो मिला। लेकिन उन्होंने पूरक प्रश्न पूछकर मंत्री को सकते में डाल दिया। आईपी गुप्ता के इस सवाल का जवाब विभागीय मंत्री नहीं दे सके, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार की तरफ से विधायक के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि सरकार को भी इसकी चिंता है।
मधेपुरा में सरकार ने मेडिकल कॉलेज स्थापित किया है। लेकिन आज की स्थिति में जब भी वहां डॉक्टरों को पदस्थापित किया जाता है, वह नहीं जाते हैं। इसलिए सरकार आगे पॉलिसी बनाने जा रही है कि जो डॉक्टर सरकारी नौकरी कर रहे हैं उन्हें किसी भी हाल में प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करने देंगे। सम्राट चौधरी ने कहा कि सहरसा सदर अस्पताल की सरकार ने समीक्षा कराई थी।
जिस जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनना है, वहां मैं और खुद मुख्यमंत्री भी निरीक्षण के लिए गए थे और सभी चीजों को देखा है। अगर सदस्य चाहते हैं तो उसकी फिर से समीक्षा कराई जाएगी कि उक्त भूमि पर मेडिकल कॉलेज बनाया जा सकता है या नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने सदन को बताया कि जहां तक पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात है तो सरकार इसकी पॉलिसी बना रही है।
बता दें कि आईपी गुप्ता ने सवाल पूछा था कि 2023 में मेडिकल कॉलेज खोलने के अप्रुवल मिला था। इसके लिए जमीन का हस्तांतरण 2025 में हुआ है। इस कार्य में दो साल लग गए। उन्होंने पूछा कि सहरसा सदर अस्पताल के पास 21 एकड़ जमीन उपलब्ध है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध है, क्या सरकार तत्कालिक तौर पर सदर अस्पताल में मेडिकल कॉलेज खोलने का विचार रखती है या नहीं? सरकार का कहना है कि पीपीपी मोड में इसको शुरू करेंगे तो यह कब टेंडरिंग प्रोसेस में जाएगा? और पीपीपी मोड का मेथड क्या होगा?