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Bihar assembly elections: पहला चरण, 71 सीट, अधिसूचना जारी, NDA और महागठबंधन में सीट पर रार जारी

By एस पी सिन्हा | Updated: October 1, 2020 15:37 IST

पहले चरण के जिन 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, यह राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का गढ़ माना जाता है. निर्वाचन आयोग ने पहले चरण के तहत चुनाव होने वाले 71 सीटों के लिए नामांकन की अधिसूचना जारी कर दी है.

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ठळक मुद्दे महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हो सका है. माले ने महागठबंधन के फाइनल होने वाले फॉर्मूले से पहले ही 30 उम्मीदवार की सीट फाइनल कर दी है. एनडीए, महागठबंधन, तीसरा मोर्चा समेत तमाम दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों और सीटों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने का काम तेज कर दिया है.

पटनाः बिहार विधानसभा के चुनाव में 28 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण की 71 सीटों के लिए होने वाले मतदान के लिए नामांकन आज से शुरू हो गया है. लेकिन अब तक किसी भी गठबंधन में सीट शेयरिंग की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है.

एनडीए में लोजपा को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है. दूसरी तरफ महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हो सका है. पहले चरण के जिन 16 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, यह राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का गढ़ माना जाता है. निर्वाचन आयोग ने पहले चरण के तहत चुनाव होने वाले 71 सीटों के लिए नामांकन की अधिसूचना जारी कर दी है.

इसी बीच माले ने महागठबंधन के फाइनल होने वाले फॉर्मूले से पहले ही 30 उम्मीदवार की सीट फाइनल कर दी है. अधिकतर दलों में उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है. एनडीए, महागठबंधन, तीसरा मोर्चा समेत तमाम दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों और सीटों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने का काम तेज कर दिया है. हालांकि सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक एनडीए और महागठबंधन में रार मची हुई है.

लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने मिलकर एनडीए का सफाया कर दिया था

2015 के चुनाव में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने मिलकर एनडीए का सफाया कर दिया था. पहले चरण के 71 सीटों में से 25 पर राजद का कब्जा है, जबकि 21 सीटें जदयू के पास हैं. भाजपा को यहां 14 सीटें मिली थीं और कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके अलावा जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को एक, सीपीआई को एक और एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली थी.

लोजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं. महागठबंधन से अलग होकर जदयू ने भाजपा समेत दूसरे दलों के साथ गठबंधन बनाया है. इस लिहाज से देखें तो पहले चरण की आधी सीटों पर जदयू- भाजपा और हम का कब्जा है. तीनों दलों के पास 36 सीटें हैं. 

वहीं, कांग्रेस और राजद का 33 सीटों पर कब्जा है. पहले चरण में तेजस्वी यादव के सामने अपनी सीटों को बचाए रखने की बडी चुनौती है. 2015 के चुनाव में यहां पर सबसे ज्यादा यादव समुदाय के विधायक जीतने में सफल रहे थे. इन 71 सीटों में से 22 यादव जीते हैं. जबकि राजपूत, भूमिहार और कुशवाहा समुदाय के सात-सात विधायक जीते थे.

वहीं, तीन सीटों पर कुर्मी समुदाय के विधायक का कब्जा है. जबकि 13 सुरक्षित सीटों पर एससी-एसटी समुदाय के विधायक जीते हैं. महागठबंधन में शामिल राजद, कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों की हालत भी अलग नहीं है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीट बंटवारे को लेकर बैठक में शामिल हो रहे हैं.

सोनिया गांधी के आवास पर सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जाएगा

माना जा रहा है सोनिया गांधी के आवास पर सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जाएगा. फिलहाल महागठबंधन के भीतर लगातार बैठकों का दौर जारी है. महागठबंधन में शामिल सभी पार्टियों के सीनियर नेता सीट शेयरिंग फॉर्मूला फाइनल करने में जुटे हैं. 

इसबीच, पहले चरण में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए सरकार के सात मंत्रियों की किस्मत का फैसला होना है. इनमें चार जदयू कोटे से मंत्री हैं तो तीन भाजपा कोटे के मंत्री हैं. जदयू कोटे से मंत्रियों में जमालपुर से जीते शैलेश कुमार, घोसी से जीते कृष्णनंदन वर्मा, राजपुर से जीते संतोष कुमार निराला और दिनारा से जीते जय कुमार सिंह शामिल हैं. वहीं, भाजपा कोटे वाले मंत्रियों में बांका से राम नारायण मंडल, चैनपुर से बृज किशोर बिन्द और गया से जीते प्रेम कुमार शामिल हैं.

सूत्र बताते हैं कि बिहार में एनडीए सरकार के कई मंत्री एंटी इंकंबेंसी की भेंट चढ़ सकते हैं, दरअसल, बताया जाता है कि पहले कोरोना फिर बाढ़ और विभिन्न मुद्दों को लेकर कई जिलों में नीतीश सरकार के खिलाफ लोगों में गहरा आक्रोश है. ऐसे में कई वर्तमान मंत्रियों और विधायकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

भाजपा के अंदरूनी सर्वे में एंटी इंकंबेसी का फैक्ट सामने आया था. यही वजह है कि इस बार चुनाव में भाजपा नेता सीट बंटवारे के दौरान जदयू के बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर दे रही है, कम नहीं. भाजपा के सर्वे में भी पार्टी के नेताओं ने 30 सिटिंग एमएलए को इस बार टिकट नहीं देने की सिफारिश की है.

यहां बता दें कि बिहार विधान सबा चुनाव के पहले चरण की विधानसभा सीटें है, जिनमें कहलगांव, सुल्तानगंज, अमरपुर, धोरैया (एससी), बांका, कटोरिया (एसटी), बेलहर, तारापुर, मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढा, लखीसराय, शेखपुरा, बरबीघा, मोकामा, बाढ, मसौढी (एससी), पालीगंज, बिक्रम, संदेश, बडहरा, आरा, अगियांव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर, ब्रह्मपुर, बक्सर, डुमरांव, रायपुर (एससी), मोहनिया (एससी), भभुआ, चैनपुर, चेनारी (एससी), सासाराम, करगहर, दिनारा, नोखा, देहरी, काराकाट, अरवल, कुर्था, जहानाबाद, घोसी, मखदूमपुर (एससी), गोह, ओबरा, नबी नगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज, (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोध गया (एससी), गया टाउन, टेकारी, बेलागंज, अतरी, वजीरगंज, राजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर, वरसालीगंज, सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई सीटें शामिल हैं.

टॅग्स :बिहार विधान सभा चुनाव २०२०पटनाकांग्रेसभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)जेडीयूआरजेडीलालू प्रसाद यादवसोनिया गाँधीराष्ट्रीय रक्षा अकादमीनीतीश कुमारसुशील कुमारजेपी नड्डा
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