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Ayodhya Verdict: पीएम मोदी ने कहा, 'ये किसी की हार-जीत नहीं, रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का समय'

By विनीत कुमार | Updated: November 9, 2019 13:08 IST

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने ये भी उम्मीद जताई कि ये फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा।

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ठळक मुद्देअयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीएम मोदी ने किया ट्वीट पीएम मोदी ने कहा- यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगाअमित शाह ने भी फैसले का किया स्वागत, कहा- मुझे विश्वास अयोध्या पर फैसला अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के शनिवार को फैसले के बाद कहा कि इसे किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पीएम ने ट्वीट कर कहा, 'रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।'

वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी समुदायों और धर्म के लोगों को सहजता से स्वीकार करना चाहिए। 

पीएम नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किया ट्वीट

फैसला आने के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।'

पीएम ने आगे लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया।'

साथ ही पीएम मोदी ने ये भी उम्मीद जताई कि अयोध्या को लेकर फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा। हमारे देश की हजारों साल पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयों को शांति और संयम का परिचय देना है। भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है।'

'अमित शाह ने कहा- फैसला अपने आप में मील का पत्थर'

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी समुदायों और धर्म के लोगों को सहजता से स्वीकार करना चाहिए।

अमित शाह ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ देर बाद ट्वीट कर कहा, 'श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वसम्मति से आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। मैं सभी समुदायों और धर्म के लोगों से अपील करता हूँ कि हम इस निर्णय को सहजता से स्वीकारते हुए शांति और सौहार्द से परिपूर्ण ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्प के प्रति कटिबद्ध रहें।'

अमित शाह ने साथ ही कहा कि उन्हें भरोसा है कि अयोध्या पर फैसला अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा। अमित शाह ने ट्वीट किया, 'मुझे पूर्ण विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह निर्णय भारत की एकता, अखंडता और महान संस्कृति को और बल प्रदान करेगा।'

साथ ही गृह मंत्री ने लिखा, 'दशकों से चले आ रहे श्री राम जन्मभूमि के इस कानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है। मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनन्दन करता हूं। श्री राम जन्मभूमि कानूनी विवाद के लिए प्रयासरत; सभी संस्थाएं, पूरे देश का संत समाज और अनगिनत अज्ञात लोगों जिन्होंने इतने वर्षों तक इसके प्रयास किया मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।'

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुये केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिये पांच एकड़ भूमि आवंटित की जाये। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस फैसले को सुनाया। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे।

टॅग्स :अयोध्या फ़ैसलाराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामलाअयोध्या विवादनरेंद्र मोदीअमित शाहसुप्रीम कोर्ट
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