लाइव न्यूज़ :

सुनवाई के बाद सीट से उठते ही मैं अदालती बातों को भूल जाता हूं : न्यायमूर्ति एसए बोबडे

By भाषा | Updated: November 10, 2019 06:24 IST

शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाने वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति बोबडे को मामले की सुनवाई पूरा होने के दो दिन बाद और फैसले से सिर्फ 10 दिन पहले भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।

Open in App
ठळक मुद्देअयोध्या जैसे अत्यधिक दबाव वाले मामलों में मैराथन सुनवाई करने वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे का कहना है कि इन मामलों की सुनवाई को सहजता से लेते हैं और उनको इन सब चीजों से ज्यादा तनाव नहीं होता है। जब अदालत का माहौल गर्म होता है, दोनों पक्षों के वकीलों की ओर से तर्कों की बौछार हो रही होती है, तो ऐसे में स्वयं को तनाव-मुक्त रखने को लेकर बोबडे ने कहा कि सुनवाई के बाद जब मैं सीट से उठता हूं, तो मैं उस पल को भूल जाता हूं, जिससे मुझे तनाव नहीं होता।

अयोध्या जैसे अत्यधिक दबाव वाले मामलों में मैराथन सुनवाई करने वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे का कहना है कि इन मामलों की सुनवाई को सहजता से लेते हैं और उनको इन सब चीजों से ज्यादा तनाव नहीं होता है। जब अदालत का माहौल गर्म होता है, दोनों पक्षों के वकीलों की ओर से तर्कों की बौछार हो रही होती है, तो ऐसे में स्वयं को तनाव-मुक्त रखने को लेकर बोबडे ने कहा कि सुनवाई के बाद जब मैं सीट से उठता हूं, तो मैं उस पल को भूल जाता हूं, जिससे मुझे तनाव नहीं होता।

शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाने वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति बोबडे को मामले की सुनवाई पूरा होने के दो दिन बाद और फैसले से सिर्फ 10 दिन पहले भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 29 अक्टूबर को सीजेआई के रूप में उनकी नियुक्ति के वारंट पर हस्ताक्षर किए। इस महीने की शुरुआत में ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में तनाव कम करने से संबंधित पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस क्षण को भूल जाता हूं जब मैं सीट से उठता हूं। मैं बस उसे भूल जाता हूं।’’

न्यायमूर्ति बोबडे 18 नवंबर को भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। महाराष्ट्र के एक वकील परिवार से आने वाले न्यायाधीश ने आधार प्रकरण सहित कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है। वह देश के 47वें सीजेआई होंगे।

न्यायमूर्ति बोबडे अगस्त 2017 में निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने वाली संविधान पीठ के भी सदस्य थे। निजता का सवाल आधार योजना की सुनवाई के दौरान उठा था और फिर इसे नौ सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया गया था।

शीर्ष अदालत के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय न्यायमूर्ति बोबडे वर्तमान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का स्थान लेंगे जो 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

न्यायमूर्ति बोबडे 23 अप्रैल, 2021 तक देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे। कानून मंत्रालय ने न्यायमूर्ति बोबडे की देश के नये प्रधान न्यायाधीश पद पर नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की थी। न्यायमूर्ति बोबडे करीब 17 महीने इस पद पर रहेंगे।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने स्थापित परपंरा के अनुरूप अपने उत्तराधिकारी के रूप में शीर्ष अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति बोबडे की नियुक्ति की सिफारिश केन्द्र से की थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की अध्यक्षता भी न्यायमूर्ति बोबडे ने ही की थी। इस समिति में दो महिला न्यायाधीश भी थीं। शीर्ष अदालत की एक पूर्व कर्मचारी ने यह आरोप लगाया था।

न्यायमूर्ति बोबडे उस तीन सदस्यीय पीठ के भी सदस्य थे जिसने 2015 में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड नहीं रखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने हाल ही में क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के कामकाज का संचालन करने वाली प्रशासकों की समिति को अपना काम खत्म करने का निर्देश दिया ताकि बीसीसीआई के संचालन के लिये नये सदस्यों का निर्वाचन हो सके। शीर्ष अदालत ने ही प्रशासकों की इस समिति की नियुक्ति की थी।

नागपुर में 24 अप्रैल, 1956 को जन्मे न्यायमूर्ति बोबडे ने नागपुर विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक और फिर कानून की शिक्षा पूरी की। न्यायमूर्ति बोबडे ने 1978 में महाराष्ट्र बार काउन्सिल में पंजीकरण कराने के बाद बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में वकालत शुरू की।

वह 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाये गये थे। न्यायमूर्ति बोबडे की 29 मार्च 2000 को बंबई उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश पद पर नियुक्ति हुयी।

वह 16 अक्टूबर 2012 को मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और 12 अप्रैल 2013 को पदोन्नति देकर उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाया गया।

टॅग्स :अयोध्या फ़ैसलाअयोध्या विवादअयोध्याराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामलाराम जन्मभूमिराम मंदिरसुप्रीम कोर्टशरद अरविंद बोबडे
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

पूजा पाठमर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी?, पूंछ को हिला नहीं पाए थे भीम?

पूजा पाठअहिरावण वध के लिए हनुमान जी ने धारण किया था पंचमुखी स्वरूप?, श्रीराम-लक्ष्मण को कैद से मुक्त कराया, जानें कहानी

पूजा पाठRam Navami 2026: आइए श्रीराम को जीवन में स्थापित करें!

भारत अधिक खबरें

भारतवाराणसी का रोम-रोम हुआ रोमांचित, दर्शकों ने देखा कैसा था सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन, देखें Photos

भारतराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीः उत्तरार्द्ध में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम