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जानें कौन हैं अयोध्या में भाजपा को हराने वाले अवधेश प्रसाद, सपा का दलित चेहरा, मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: June 5, 2024 15:40 IST

अयोध्या में इसी साल जनवरी महीने में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के बाद भी इस सीट पर भाजपा का हार जाना चर्चा का विषय रहा है। भाजपा ने राम मंदिर को सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया लेकिन इसके बावजूद इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद जीत गए।

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ठळक मुद्देसबसे ज्यादा चर्चा अयोध्या में भाजपा की हार की हो रही हैसांसद लल्लू सिंह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद से 54567 मतों के अंतर से पराजित हो गयेअवधेश प्रसाद को सपा के दलित चेहरे के रूप में देखा जाता है

Ayodhya: लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को सबसे ज्यादा झटका उत्तर प्रदेश में लगा है। इसमें भी सबसे ज्यादा चर्चा अयोध्या में भाजपा की हार की हो रही है। अयोध्‍या स्थित फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार और सांसद लल्लू सिंह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद से 54567 मतों के अंतर से पराजित हो गये। निर्वाचन आयोग के अनुसार फैजाबाद (अयोध्या) संसदीय सीट पर सपा के अवधेश प्रसाद को 5,54,289 मत मिले, जबकि लल्‍लू सिंह को 4,99,722 मिले।

अयोध्या में इसी साल जनवरी महीने में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के बाद भी इस सीट पर भाजपा का हार जाना चर्चा का विषय रहा है। भाजपा ने राम मंदिर को सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया लेकिन इसके बावजूद इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद जीत गए। ऐसे में लोगों में ये जानने की उत्सुकता है कि आखिर अवधेश प्रसाद हैं कौन। 

सपा का दलित चेहरा

प्रतिष्ठा की लड़ाई में भाजपा से सीट छीनने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अनुभवी विधायक अवधेश प्रसाद गैर-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से जीतने वाले दलित समुदाय के एकमात्र उम्मीदवार हैं।  प्रसाद ने फैजाबाद में दलित वोटों के दम पर भाजपा के दो बार के मौजूदा सांसद लल्लू सिंह को 54,567 वोटों से हराया। अवधेश प्रसाद को सपा के दलित चेहरे के रूप में देखा जाता है। 77 वर्षीय अवधेश प्रसाद पासी समुदाय से हैं। वह सपा के संस्थापक सदस्यों में से हैं और 1974 से लगातार पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ रहे हैं। वह नौ बार विधायक रहे हैं और अब पहली बार सांसद बने हैं। 

लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक प्रसाद ने 21 साल की उम्र में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।  वह पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय क्रांति दल में शामिल हुए। उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव अयोध्या के सोहावल से 1974 में लड़ा। आपातकाल के दौरान प्रसाद ने आपातकाल विरोधी संघर्ष समिति के फैजाबाद जिले के सह-संयोजक के रूप में कार्य किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में रहते हुए, उनकी माँ का निधन हो गया और वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पाने में असफल रहे। 

1992 में जब मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी बनाई तब अवधेश प्रसाद ने भी उनका साथ दिया। प्रसाद को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और इसके केंद्रीय संसदीय बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें सपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। संसदीय चुनाव उन्होंने पहली बार जीता है। इससे पहले 1996 में अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र से एक बार वह हार चुके हैं। 

प्रसाद को विधानसभा चुनावों में अब तक नौ चुनावों में केवल दो बार हार मिली।  2017 में भी वह मिल्कीपुर से एसपी उम्मीदवार के रूप में हार गए थे। अब एसपी के दलित चेहरे अवधेश प्रसाद को और अधिक प्रसिद्धि मिल सकती है।  

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