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... जब एक वोट से गिर गई थी वाजपेयी सरकार, मायावती बनी थीं गेम चेंजर

By रामदीप मिश्रा | Updated: August 17, 2018 07:13 IST

when atal bihari vajpayee lost no confidence motion: अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके हाद उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों में गिर गई थी। 

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नई दिल्ली, 16 अगस्तः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। वे भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम कार्य किए हैं। वहीं, उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो सबसे ज्यादा चर्चा संसद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर होती रही है। उन्होंने पहली बार 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके हाद उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों में गिर गई थी। 

3 बार पीएम बनने के पर ऐसा रहा कार्यकाल

बताया जाता है कि पहली बार शपथ ग्रहण करने के बाद वाजपेयी ने संसद में फ्लोर टेस्ट से पहले महसूस कर लिया था कि उनकी सरकार गिर जाएगी, जिसकी चलते 28 मई, 1996 को विश्वास मत से पहले ही वाजपेयी ने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद वे 1998 में दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। 13 महीने सरकार चलने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को संसद में विश्वास मत पेश करना पड़ा, जिसमें वाजपेयी एक वोट से हार गए। वहीं, उन्होंने तीसरी बार 2003 में सत्ता में वापसी की और उनके खिलाफ फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसमें उन्होंने जीत हासिल की।

मायावती की एक चाल ने गिरा दी थी सरकार

अटल सरकार को 17 अप्रैल 1999 को लोकसभा में फ्लोर पर बहुमत साबित करना था, लेकिन मायावती की एक चाल ने सब कुछ गड़बड़ कर दिया। सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी मतदान में हिस्सा नहीं लेगी। थोड़ी देर बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई और बसपा सुप्रीमो ने अपना स्टैंड बदल दिया और उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट कर दिया। 

सांसद गिरधार गमांग के वोट से भी बच सकती थी सरकार 

अटल सरकार के लिए अब सिर्फ उम्मीद ओडिशा के कोरापुट से सांसद गिरधार गमांग बचे हुए थे, जिन्होंने दो महीने पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नियम के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर सदन से इस्तीफा देना होता है। गमांग भी बीजेपी सरकार के खिलाफ हो गए और उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट किया, जिसके बाद वाजयेपी सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई थी और 13 महीने पुरानी वाजपेयी सरकार गिर गई। सरकार को पक्ष 270 वोट चाहिए थे, लेकिन उसे 269 मिले। 

इस बीमारी के शिकार से थे वाजपेयी

आपको बता दें, अटल बिहारी वाजपेयी का निधन गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण आदि की वजह से हो गया। उन्हें इस साल 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह के शिकार 93 वर्षीय भाजपा नेता का एक ही गुर्दा काम कर रहा था। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ। अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता के कारण वे चार दशकों से भी अधिक समय से भारतीय संसद के सांसद रहे। इसके अलावा दो बार भारत के प्रधानमंत्री पद पर भी सुशोभित हुए। अटल जी अपनी सात्विक राजनीति और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनके भाषणों का ऐसा जादू कि लोग सुनते ही रहना चाहते हैं। वाजपेयी ने तबीयत के चलते कई साल पहले सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था।

टॅग्स :अटल बिहारी वाजपेयीभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)राष्ट्रीय रक्षा अकादमी
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