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अनुच्छेद 370: कश्मीर को लेकर चीन पाकिस्तान को दे रहा 'खुला समर्थन', ब्रिटेन, अमेरिका और रूस ने भी अपना पक्ष रखा

By भाषा | Updated: August 16, 2019 21:02 IST

भारत, अंतरारष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बता चुका है कि जम्मू-कश्मीर से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाकर विशेष दर्जा वापस लिया जाना उसका अंदरूनी मामला है और पाकिस्तान इस वास्तविकता को स्वीकार करे।

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ठळक मुद्देबैठक बंद कमरे में होगी, जिसमें सिर्फ पांच स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य ही शिरकत करेंगे।सुरक्षा परिषद के शेष चार सदस्य ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को सुलझाएं: रिपोर्टभारत, अंतरारष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बता चुका है कि जम्मू-कश्मीर से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाकर विशेष दर्जा वापस लिया जाना उसका अंदरूनी मामला है और पाकिस्तान इस वास्तविकता को स्वीकार करे।

भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिये जाने के मामले पर शुक्रवार को होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बैठक से पहले पाकिस्तान को सिर्फ चीन का ही "खुला समर्थन" हासिल है। इसे लेकर पाकिस्तान के एक प्रमुख समाचार पत्र ने लिखा है कि सुरक्षा परिषद पाकिस्तान का समर्थन करती प्रतीत नहीं होती।

बैठक बंद कमरे में होगी, जिसमें सिर्फ पांच स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य ही शिरकत करेंगे। भारत, अंतरारष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बता चुका है कि जम्मू-कश्मीर से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाकर विशेष दर्जा वापस लिया जाना उसका अंदरूनी मामला है और पाकिस्तान इस वास्तविकता को स्वीकार करे।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से खबर दे रहे पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी दूत मलीहा लोधी और उनकी टीम इस महीने के आरंभ से ही संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को यह समझाने में जुटी है कि कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के भारत के फैसले से दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता को किस तरह खतरा है।

यह भी पढ़ें- भारत पाकिस्तान से कैसे है बेहतर, वहां के लोगों ने दिए इमानदारी भरे जवाब, देखें

समाचार पत्र के अनुसार, "लेकिन सुरक्षा परिषद के मौजूदा सदस्य पाकिस्तान के समर्थन में नजर नहीं आ रहे।" जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर चर्चा के पाकिस्तान के अनुरोध पर चीन ने यह बैठक बुलाई है।

समाचार पत्र के मुताबिक सुरक्षा परिषद के शेष चार सदस्य ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को सुलझाएं।

अखबार के मुताबिक 10 अस्थायी सदस्यों बेल्जियम, कोटे डि आइवर, डोमिनिक रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गिनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरु, पोलेंड और दक्षिण अफ्रीका में से इंडोनेशिया और कुवैत ने ही अतीत में पाकिस्तान से सहानुभूति दिखाई है, लिहाजा चीन के अनुरोध पर शेष देशों को मनाना काफी मुश्किल काम होगा। 

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