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कोरोना वायरस और उसके वेरिएंट से लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार, एक हजार गुना ज्यादा है शक्तिशाली

By अभिषेक पारीक | Updated: July 29, 2021 20:35 IST

कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका के बीच जर्मनी से अच्छी खबर आई है। वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के घातक स्वरूपों से निपटने में सक्षम है।

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ठळक मुद्देवैज्ञानिकों ने भेड़ के रक्त से एंटीबॉडी तैया की है, जो कोरोना वायरस और उसके वेरिएंट को निष्क्रिय कर सकती हैं। जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के अनुसंधानकर्ताओं ने एंटीबॉडी विकसित की है। पूर्व में विकसित एंटीबॉडी की तुलना में यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस को हजार गुना अधिक निष्क्रिय कर सकती हैं। 

कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका के बीच जर्मनी से अच्छी खबर आई है। वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के घातक स्वरूपों से निपटने में सक्षम है। इससे उन लोगों को काफी राहत मिली हैं जो कोरोना के नए वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन के कम प्रभावी होने की खबरों से चिंतित हैं। 

वैज्ञानिकों ने भेड़ के रक्त से ऐसी शक्तिशाली एंटीबॉडी विकसित की हैं जो कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस (सार्स-सीओवी-2) और इसके नए घातक स्वरूपों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकती हैं। 

जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट (एमपीआई) फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के अनुसंधानकर्ताओं ने उल्लेख किया कि ये सूक्ष्म एंटीबॉडी पूर्व में विकसित की गईं इस तरह की एंटीबॉडी की तुलना में कोरोना वायरस को एक हजार गुना अधिक निष्क्रिय कर सकती हैं। इस अनुसंधान से संबंधित रिपोर्ट 'एम्बो' पत्रिका में प्रकाशित हुई है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान में इन एंटीबॉडी का चिकित्सीय परीक्षण किए जाने की तैयारी चल रही है।

उन्होंने कहा कि कम दाम में इन एंटीबॉडी का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जा सकता है और ये कोविड-19 उपचार से संबंधित वैश्विक मांग को पूरा कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि एंटीबॉडी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता की मदद करती हैं। ये वायरस से चिपककर उसे निष्क्रिय कर देती हैं। 

भारत में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट को कोरोना की दूसरी लहर को जिम्मेदार माना जा रहा है। वहीं अब दुनिया के कई देशों में बढ़ रहे मामलों के लिए भी डेल्टा वेरिएंट को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है। साथ ही डेल्टा प्लस वेरिएंट ने भी चिंता को बढ़ा दिया है। 

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