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राम मंदिर मामला: जमीयत उलेमा हिंद ने कहा-"समीक्षा याचिका दायर करने नहीं पहुंचे राजीव धवन इसलिए नाम हटाया गया"

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 3, 2019 10:28 IST

एजाज के मुताबिक, वह कल ही समीक्षा याचिका दायर करना चाहते थे, लेकिन श्री राजीव धवन नहीं पहुंचे। यही वजह रहा है कि राजीव धवन का नाम  याचिका में नहीं दिया गया है। इसकी वजह साफ है कि राजीव मीटिंग में उपलब्ध नहीं थे। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।

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ठळक मुद्देएजाज ने कहा कि राजीव धवन का नाम  याचिका में नहीं दिया गया इसकी वजह साफ है कि राजीव मीटिंग में उपलब्ध नहीं थे। अपने सोशल मीडिया पर अधिवक्ता राजीव धवन ने यह भी लिखा है कि मैं अब समीक्षा या मामले की सुनवाई में शामिल नहीं हूं।

राम मंदिर केस के वकील राजीव धवन को पुनर्विचार याचिका से बाहर करने के फैसले पर जमीयत इस्लाम हिंद की तरफ से बयान आया है। इस बयान में एजाज मकबूल ने कहा है कि श्री राजीव धवन को उनकी बीमारी के कारण केस (जमीयत उलेमा-ए-हिंद समीक्षा अयोध्या मामले में) से हटा दिया गया था।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मेरे मुवक्किल ( वकील जमीयत उलेमा-ए-हिंद) से जुड़ा है। एजाज के मुताबिक, वह कल ही समीक्षा याचिका दायर करना चाहते थे, लेकिन श्री राजीव धवन नहीं पहुंचे। यही वजह रहा है कि राजीव धवन का नाम  याचिका में नहीं दिया गया है। इसकी वजह साफ है कि राजीव मीटिंग में उपलब्ध नहीं थे। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।

आपको बता दें कि राम मंदिर मामले में मुस्लिम पक्षकारों (सुन्नी वक्फ बोर्ड व दूसरे संगठनों) की ओर से कोर्ट में सुनवाई करने वाले वाले वकील राजीव धवन का नाम जमीयत उलेमा हिंद ने हटा दिया है। अपने सोशल मीडिया माध्यमों पर खुद इस बारे में लिखकर राजीव धवन ने जानकारी दी है। वह लिखते हैं कि बिन किसी फॉर्मल इंफॉर्मेशन के पुनर्विचार याचिका के लिए मेरा नाम हटा दिया गया है। 

अपने सोशल मीडिया पर अधिवक्ता राजीव धवन ने यह भी लिखा है कि मैं अब समीक्षा या मामले की सुनवाई में शामिल नहीं हूं। मुझे श्री मदनी ने संकेत दिया है कि मेरे नाम को इस मामले से हटा दिया गया क्योंकि मैं अस्वस्थ था। इसके साथ ही राजीव लिखते हैं कि जो तर्क देकर मेरे नाम को इस मामले से हटाया गया वह बिल्कुल बकवास है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि राजीव धवन सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से इस मामले में पेश होने वाले मुख्य वकील थे। हालांकि, इस मामले में मुस्लिम पक्ष को उनका दावा नहीं मिल पाया था।   

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