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चेन्नई में डॉक्टरों द्वारा संचालित 24x7 रिमोट मॉनिटरिंग 'आईलिव कनेक्ट' लांच

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 19, 2026 13:28 IST

भारत में रोज़ाना करीब 8000 हज़ार लोगों की मौत दिल की बीमारियों के कारण हो रही है। आंकड़े के मुताबिक़ रोजाना 10,000 से 15,000 हार्ट अटैक के मामले सामने आते हैं, जिनमें से 3,000 से 5,000 मामलों में मौत हो जाती है। कई मामलों में तो पहले से कोई लक्षण भी नहीं दिखते। कार्डियोवैस्कुलर और थोरैसिक सर्जन डॉ. राहुल चंदोला ने ये बात चेन्नई में iLive Connect (आईलिव कनेक्ट) के साउथ इंडिया लॉन्च के दौरान कही।

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भारत में रोज़ाना करीब 8000 हज़ार लोगों की मौत दिल की बीमारियों के कारण हो रही है। आंकड़े के मुताबिक़ रोजाना 10,000 से 15,000 हार्ट अटैक के मामले सामने आते हैं, जिनमें से 3,000 से 5,000 मामलों में मौत हो जाती है। कई मामलों में तो पहले से कोई लक्षण भी नहीं दिखते। कार्डियोवैस्कुलर और थोरैसिक सर्जन डॉ. राहुल चंदोला ने ये बात चेन्नई में iLive Connect (आईलिव कनेक्ट) के साउथ इंडिया लॉन्च के दौरान कही। साथ ही iLive Connect के संस्थापक डॉक्टर चंदोला ने बताया की ये डिवाइस अचानक होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

iLive Connect (आईलिव कनेक्ट) एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें वियरेबल बायोसेंसर पैच और वेलनेस ब्रेसलेट की मदद से दिल की गतिविधि और ब्लड प्रेशर जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर्स की रियल-टाइम निगरानी 24×7 एक रिमोट कमांड सेंटर में मौजूद अनुभवी डॉक्टरों की टीम कर रही होती है जो किसी भी असामान्य की स्थिति में मरीज और उनके परिवार को तुरंत अलर्ट करते हैं।

रविवार को चेन्नई में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में लगभग 40 डॉक्टर शामिल हुए। इनमें वेंकटेश्वर अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. थिल्लई वल्लाल, एमजीएम हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. एम. ए. राजा, क्रिटिकल केयर फिजिशियन डॉ. अमित कुमार, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गोपाला मुरुगन, प्रशांत ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के एमडी डॉ. प्रशांत कृष्णा, कावेरी हॉस्पिटल के डॉ. मनोज सिवारामकृष्णन और डॉ. धनेश सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षणों के आधार पर इलाज करना काफी  नहीं, खासकर तब जब युवाओं और बिना लक्षण वाले लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर-आधारित मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म iLive Connect एक नई उम्मीद देता है जो हृदय की स्थिति का लगातार आकलन कर जोखिम की समय रहते पहचान करने में मदद करता है। 

iLive Connect के सह-संस्थापक और प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म अस्पताल के बाहर भी डॉक्टरों को मरीज की स्थिति पर नजर रखने और रियल-टाइम डेटा के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

यह प्लेटफॉर्म सिर्फ हृदय रोग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और अस्थमा जैसी बीमारियों में भी मददगार है। बुज़ुर्ग और अस्पताल से तुरंत डिस्चार्ज होने वाले मरीज़ों को भी यह तकनीक निरंतर स्वास्थ्य निगरानी और मेडिकल सहायता प्रदान करती है। 

भारत में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत हार्ट अटैक से जुड़ी मौत होती है। ऐसे में ज़रूरत अब लक्षण दिखने पर इलाज की ही नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी की है। डॉ. चंदोला ने कहा, “कार्डियक केयर का भविष्य निरंतर निगरानी में है, जहां समय रहते पहचान और इलाज से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।”

टॅग्स :Health Departmentहार्ट अटैक (दिल का दौरा)Heart attack
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