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डॉक्टर से जानें कुछ फायदे नीचे बैठकर खाने के

By लोकमत न्यूज़ ब्यूरो | Updated: October 14, 2018 10:29 IST

डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना सुविधाजनक भले ही लगता हो, लकिन सेहत के लिए ठीक नहीं है।

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(डॉ. विनोद गुप्ता)

बैठकर निश्चिंत होकर खाने से जो तृप्ति मिलती है उसका मुकाबला डाइनिंग टेबल या बुफे नहीं कर सकते। इसके अलावा, भोजन परोसकर खिलाने में जो मनवार की जाती है, वह डाइनिंग टेबल पर  बुफे में कहां? अपने हाथ से लो और खाओ। कोई मनवार करने वाला नहीं।

अब से कुछ दशक पहले तक देश में बैठकर खाने की परंपरा थी। लोग अपने घरों में फर्श पर बैठकर और आलतीपालकी लगाकर भोजन करते थे। प्रसंग चाहे ब्याह शादी का हो या किसी के जन्मदिन का अथवा मृत्युभोज का, हर अवसर पर पंगत बैठकर ही लोग भोजन ग्रहण करते थे।

आज परिदृश्य पूर्णत: बदल गया है। फर्श पर बैठकर खाना पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाने लगा है। नई पीढ़ी तो फर्श पर बैठकर खाना जानती ही नहीं। पुरानी पीढ़ी के लोग भी इसे छोड़ डाइनिंग टेबल पर आ गए हैं। पार्टी, समारोह में भी ‘पंगत’ का स्थान ‘बुफे’ ने ले लिया है। कहने का आशय यह है कि नीचे बैठकर खाना बीते जमाने की बात होकर रह गई है। आधुनिकता और फैशन के नाम पर भोजन करने के ढंग में आए इस बदलाव से लाभ कम, हानि ही अधिक हो रही है।

बैठकर निश्चिंत होकर खाने से जो तृप्ति मिलती है उसका मुकाबला डाइनिंग टेबल या बुफे नहीं कर सकते। इसके अलावा, भोजन परोसकर खिलाने में जो मनवार की जाती है, वह डाइनिंग टेबल पर  बुफे में कहां? अपने हाथ से लो और खाओ। कोई मनवार करने वाला नहीं।

शादी समारोह या अन्य बड़ी पार्टियों में बुफे किसी ‘गिद्धभोज’ से कम नहीं होता। सारे लोग भूखे भेड़ियों की भांति स्टॉल पर टूट पड़ते हैं। गोया भोजन खत्म हो जाएगा और उन्हें मिलेगा ही। यही नहीं एक बार में पूरी प्लेट भर लाते हैं ताकि दोबारा भीड़ में जाने से बचें। ऐसे में जितना वे लाते हैं, उसमें से आधा जूठा छोड़ते हैं। साथ ही जूठे हाथ से लेने पर सारा भोजन ही जूठा कर देते हैं।

बुफे में एक हाथ से प्लेट पकड़कर एक हाथ से खाना खाने में काफी असुविधा और परेशानी होती है। यदि बीच में पानी की आवश्यकता हो तो प्लेट छोड़कर पानी की स्टॉल तक जाना पड़ता है। छोटे बच्चे तो प्लेट संभाल ही नहीं पाते।

डाइनिंग टेबल पर खाना खाएं तो

बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं  आदि को खड़े-खड़े खाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही नहीं, वे थक भी जाते हैं। डायनिंग टेबल पर भी लोग जल्दबाजी में या हायतौबा में खाते हैं। यहां तक कि अपने जूते-चप्पल तक नहीं उतारते। भोजन से पहले हाथ धोने का तो प्रश्न ही नहीं है।

डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना सुविधाजनक भले ही लगता हो, लकिन सेहत के लिए ठीक नहीं है। जमीन पर आसन लगाकर बैठकर खाने से अनेक लाभ हैं। पहले के लोग शुरू से ही आलतीपालती लगाकर भोजन करते थे, इसलिए उन्हें जोड़ों की समस्या से रूबरू नहीं होना पड़ता था।  ताउम्र उनके जोड़ों में लचकता बनी रहती थी तथा वे क्रियाशील रहते थे। लेकिन आज अल्पायु में ही लोगों के जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

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जमीन पर बैठकर भोजन करने से एक विशिष्ट आनंद की अनुभूति होती है। इससे आप तनावमुक्त होते हैं। आसन लगाकर बैठकर खाने से रक्त का संचार भी शरीर में सुचारू रूप से होता है। जब आप बैठकर खाते हैं तो पीठ और पेट के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव आने से उनकी लोचकता बढ़ती है। यदि आप डाइनिंग टेबल पर भोजन करते हैं तो इससे खून का बहाव पैरों की तरफ होता है।

शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ इंसान को बैठकर खाने को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। हां, यदि ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस की समस्या के कारण नीचे बैठने में समस्या हो तो बात अलग। कुछ लोगों को पैरों में फ्रैक्चर होने पर रॉड या प्लेट डली होती है।  ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ही नीचे बैठकर भोजन करना चाहिए।

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