'हिमालय वियाग्रा' जड़ी बूटी में मिले कैंसर इलाज में इस्तेमाल होने वाले रसायन, जानिये इस जड़ी बूटी की 5 मुख्य बातें

By उस्मान | Published: October 14, 2021 02:48 PM2021-10-14T14:48:53+5:302021-10-14T14:48:53+5:30

इस जड़ी बूटी को हिमालय फंगस या 'यारशागुंबा' और हिमालय वियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है।

cancer treatment: researcher found amazing chemicals in himalayan fungus that can treat cancer | 'हिमालय वियाग्रा' जड़ी बूटी में मिले कैंसर इलाज में इस्तेमाल होने वाले रसायन, जानिये इस जड़ी बूटी की 5 मुख्य बातें

कैंसर का इलाज

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पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी बूटी 'हिमालय फंगस' (Himalayan fungus) कैंसर के इलाज में सहायक हो सकती है। बताया जा रहा है कि इससे एक नई तरह की कीमोथेरेपी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो कैंसर के इलाज में एक बेहतर खोज होगी।

हिमालय फंगस क्या है

हिमालय फंगस को 'यारशागुंबा' और हिमालय वियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि इसमें NUC-7738 (कोर्डिसेपिन) नाम का तत्व पाया जाता है, जो कैंसर के इलाज के लिए प्रभावी है। 

ScienceAlert ने इस तत्व की पहचान की है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के  शोधकर्ताओं ने बायोफर्मासिटिकल कंपनी NuCana के साथ साझेदारी में इसका पता लगाया। यह अभी भी प्रायोगिक परीक्षण चरणों में है। हालांकि इसके नए रिपोर्ट किए गए नैदानिक ​​परीक्षणों ने एक दवा उम्मीदवार के लिए आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। 

NUC-7738 को पहली बार परजीवी कवक प्रजातियों Ophiocordyceps Sinensis में पाया गया था, जिसे आमतौर पर कैटरपिलर कवक के रूप में जाना जाता है। प्रजाति को कीट लार्वा को मारने और ममी बनाने के लिए जाना जाता है और इसे अक्सर चीन में एक जड़ी बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है।

कॉर्डिसेपिन क्या है ?

कॉर्डिसेपिन अनिवार्य रूप से एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला न्यूक्लियोसाइड एनालॉग है, जिसमें एंटी कैंसर, एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और इसे दुनिया का सबसे मूल्यवान परजीवी भी माना जाता है।

कॉर्डिसेपिन की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, NUC-7738 कुछ इंजीनियरिंग लाभों का उपयोग करता है जो इसे मानव संतुलन न्यूक्लियोसाइड ट्रांसपोर्टर 1 (hENT1) जैसे न्यूक्लियोसाइड ट्रांसपोर्टरों से स्वतंत्र रूप से कोशिकाओं में प्रवेश करने की अनुमति देता है।    

कॉर्डिसेपिन के विपरीत, NUC-7738 को कोशिकाओं तक पहुंच प्राप्त करने और अणु को बदलने के लिए hENT1 की आवश्यकता नहीं होती है, यह दर्शाता है कि यह एंजाइम एडेनोसाइन किनसे की आवश्यकता को दरकिनार कर देता है और एडीए से रक्षा करते हुए रक्तप्रवाह में टूटने के लिए प्रतिरोधी है। 

यारशागुंबा क्या है?

सामान्य तौर पर समझें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है जो एक खास कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसपर पनपता है। इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम है कॉर्डिसेप्स साइनेसिस और जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर ये उगता है उसका नाम है हैपिलस फैब्रिकस। विभिन्न स्थानों पर इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है।

इसे यारचगुम्बा, यत्सा गनबू, यार्त्सा गनबा, यत्सुगुंबू और कीड़ा जड़ी नाम से जानते हैं।  तिब्बत में 'यत्सा गनबू' का अर्थ है 'ग्रीष्मकालीन घास सर्दी कीड़ा'। इसे कीड़ा-जड़ी इसलिए कहते हैं क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी है और चीन-तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है। सबसे आसान भाषा में इसे हिमालय वियाग्रा के नाम से जानते हैं।

यारशागुंबा कहां पाया जाता है?

भारत, नेपाल, भूटान और तिब्बत में यह जड़ी बूटी हिमालय के सबसे ऊंचे स्थानों में पाई जाती है। फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून की एक रिसर्च के अनुसार, यह जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाती है जहां ट्रीलाइन खत्म हो जाती है यानी जहां के बाद पेड़ उगने बंद हो जाते हैं। मई से जुलाई में जब बर्फ पिघलती है तो इसके पनपने का चक्र शुरू जाता है। ये नरम घास के बिल्कुल अंदर छुपा होता है और बड़ी कठिनाई से ही पहचाना जा सकता है। 

Web Title: cancer treatment: researcher found amazing chemicals in himalayan fungus that can treat cancer

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