गुरुवार यानी 13 जुलाई को खेल जगत में एक और इतिहास रचा गया। आईएएएफ विश्व अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के महिला 400 मीटर फाइनल में खिताब के साथ विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली हिमा दास पहली भारतीय महिला एथलीट बनी। यह ना सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि देश के लिए भी गर्व की बात है। 18 साल की हिमा दास जब एथलेटिक्स चैंपियनशीप में जीतकर लौंटी तो उनके कोच ने उन्हें सम्मान में "गामोसा" से सम्मानित किया। नहीं, यह आम गमछे से बेहद अलग है जिसकी कहानी और मान्यताएं भी इसके इतिहास को बयान करती हैं। 

असम की रहने वाली हिमा दास ने जब यह खिताब अपने नाम किया तो जहां एक और पूरा मैदान उनकी इस जीत का जश्म मनाता दिख रहा था वहीं दूसरी ओर हिमा के कोच उन्हें गामोसा पहनाते दिखाई दिए। कुछ दिन पहले हुए विश्व योग दिवस पर देहरादून के एफआरआई में नरेन्द्र मोदी का हुआ कार्यक्रम आपने देखा होगा तो भी आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री ने भी अपने गले में सफेद-लाल रंग के इस गामोसा को पहना हुआ था। इसके बाद से ही ये गामोसा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आज हम आपको इसी गामोसा के बारे में बताएंगे साथ ही बताएंगे कि क्या है इसकी मान्यता और कैसे बनता है असली आसामी गामोसा। 

असम की शान माना जाता है गामोसा

गमछे जैसे दिखने वाले इस गामोसा की महत्ता पूर्वी भारत में सबसे अधिक है। खासकर असम में इस गामोसा का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। हैंडमेड सिल्क से बने इस गामोसा को असम में सम्मान के प्रतीक माना जाता है। असम की रहने वाली बिपाशा राजखोवा ने बताया कि असम की हर शादी या सम्मान के कार्यक्रम में इस गामोसा को दिया जाता है। अपने से बड़े या अपने से छोटे जिनका भी हम सम्मान करते हैं उनको यह गामोसा गले में पहनाया जाता है। इसके अलावा असम में भगवान को भी गामोसा चढ़ाया जाता है। 

बिहू नृत्य बिना गामोसा के हैं अधूरा

बिहू, असम के सबसे चर्चित त्योहारों में गिना जाता है। इस त्योहार में भी गामोसा का बड़ा महत्व होता है। किसान को समर्पित इस त्योहार में जब युवा जश्म मनाते हैं तो उनके सिर पर भी आप गामोसा को बंधा हुआ देख सकते हैं। मान्यता है कि गामोसा का सबसे पहला निर्माण किसान के लिए ही किया गया था। चूंकी भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए यहां के किसानों को सम्मान के रूप में यह गामोसा दिया जाता है। 

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महिलाएं अपने हाथ से बुनती हैं गामोसा

असम की महिलाएं अपने हाथ से यह गामोसा बनाती हैं। हालांकि अब यह गामोसा बाजार में आसानी से मिलता है लेकिन आज भी कई घरों में बिहू से पहले महिलाएं गामोसा बिन कर रखती हैं। इसके बाद जब किसी के घर बिहू मिलने जाती हैं या कोई बिहू मिलने आता है तो उन्हें सम्मानपूर्वक यह गामोसा उढ़ाया जाता है। आम तौर पर गामोसा में एक ओर ही फूल या डिजाइन बना होता है। लेकिन आज के समय जैसे-जैसे यह फैशन में आता जा रहा है वैसे-वैसे इसकी डिजाइन में भी परिवर्तन आता जा रहा है। 

2013 में बना सा सबसे बड़ा गामोसा, रिकॉर्ड है दर्ज

2013 में असम में सिल्क के हाथ से बुने सबसे बड़े गामोसा को बुनने का गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया गया है। उस समय के तत्कालीन सीएम तरूण गोगोई के नेतृत्व में इस विश्व रिकॉर्ड को बनाया गया था। जिसकी लम्बाई 1455.3 मीटर लम्बी थी। इस गामोसा पर असम के कई विरासतों को भी  दर्शाया गया है जिनमें रंग घर, मंजुली, संकरदेवा, भूपेन हजारिका आदि शामिल हैं।

गामोसा से बना गमछा

गामोसा को प्योर कॉटन या सिल्क से बनाया जाता है। इसकी क्वॉलिटी अच्छी होती है और असम में मिलने वाले ओरिजनल गामोसा की कीमत कम से कम 2 से 3 हजार रूपये या उससे ऊपर ही होती है। माना जाता है कि गामोसा को देखकर ही गमछे का निर्माण किया जाने लगा। जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर होते वह गामोसा की जगह गमछे का इस्तेमाल करने लगे। गमछा पतले भी होते है और सस्ते दामों में आपको कहीं भी मिल जाएंगे। ऐसा नहीं है कि पहली बार गामोसा ट्रेंड में है इससे पहले अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में भी इसका इस्तेमाल किया जा चुका है। मगर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खेल जगत में रिकॉर्ड बनाने वाली स्टार हिमा दास को गामोसा पहनते देखने के बाद इसकी चर्चा और गरम हो गई है। 

English summary :
Gamocha Assamese Culture: Hima Das to PM Narendra Modi wore gamosa. All you need to know about Assamese culture Gamocha history.


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