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स्कूलों में छात्रों की कम हाजिरी के लिए अब CBSE को रिपोर्ट देना हुआ अनिवार्य, बोर्ड ने बताई ये वजह

By भाषा | Updated: July 28, 2019 14:20 IST

बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार 2019 के नतीजों का आकलन करने पर पाया गया कि कम हाजिरी वाले बच्चों ने सीबीएसई परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन किया, जिस कारण कम हाजिरी वाले बच्चों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को तैयार करना पड़ा।

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ठळक मुद्देरीक्षा उपनियमों के नियम 14 में बताया गया है कि कितनी प्रतिशत हाजिरी तक छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट मिल सकती है छात्र उपस्थिति में छूट पाने के लिए वांछित दस्तावेज और प्रमाण पत्र जमा नहीं करा रहे और स्कूल भी सीबीएसई को हाजिरी की कमी के मामलों के बारे में सूचित नहीं कर रहे।

छात्रों की कम हाजिरी के सभी मामलों के बारे में अब स्कूलों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को सूचित करना अनिवार्य होगा और बोर्ड ही इस पर नियमानुसार अंतिम निर्णय लेगा। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार 2019 के नतीजों का आकलन करने पर पाया गया कि कम हाजिरी वाले बच्चों ने सीबीएसई परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन किया, जिस कारण कम हाजिरी वाले बच्चों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को तैयार करना पड़ा।

बोर्ड के परीक्षा उपनियमों के नियम 13 में सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में बैठने के पात्र बनने के लिए छात्रों की आवश्यक हाजिरी के बारे में बताया गया है। वहीं परीक्षा उपनियमों के नियम 14 में बताया गया है कि कितनी प्रतिशत हाजिरी तक छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट मिल सकती है या उसके परीक्षा में बैठने के संबंध में विचार किया जा सकता है।

बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ ऐसा पाया गया कि छात्र, अभिभावक और स्कूल नियमों का कठोरता से पालन नहीं कर रहे हैं। छात्र उपस्थिति में छूट पाने के लिए वांछित दस्तावेज और प्रमाण पत्र जमा नहीं करा रहे और स्कूल भी सीबीएसई को हाजिरी की कमी के मामलों के बारे में सूचित नहीं कर रहे।

2019 के नतीजों के आकलन में पाया गया कि जिन छात्रों की हाजिरी कम थी लेकिन उन्हें परीक्षा में बैठने की छूट दी गई, उन्होंने परीक्षा में खराब प्रदर्शन किया।’’ अधिकारी ने बताया कि नियमों के अनुसार लंबी बीमारी होने पर, माता या पिता के निधन पर या इसी प्रकार के किसी अन्य कारण और राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में हिस्सा लेने के लिए छात्रों को इन मानक संचालक प्रक्रियाओं से छूट दी जा सकती है।

उन्होंने ने कहा, ‘‘ सभी मामलों में स्कूल को अभिभावकों द्वारा दिए अनुरोध पत्र, संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणपत्र और आवश्यक प्रोफार्मा में संबंधित स्कूल की सिफारिश संबंधी दस्तावेज जमा कराने होंगे।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘ प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में स्कूलों को एक जनवरी तक उपस्थिति संकलित करनी होगी और कम उपस्थिति के मामलों की पहचान करनी होगी।

दस्तावेजों के साथा मामलों को सात जनवरी तक सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय में भेजना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ क्षेत्रीय कार्यालय दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की कमी के बारे में स्कूलों का बतांएगे और स्कूलों के पास इसका अनुपालन करने की समय सीमा होगी। सीबीएसई द्वारा इस मामले में मंजूरी देने के लिए अंतिम तिथि सात फरवरी होगी।’’ 

टॅग्स :सीबीएसई
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